ओडिशा: चक्रवात के बाद सड़क खराब होने से भतीजी को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा चाचा का शव
ओडिशा के जनजातीय बहुल पात्रापुर ब्लॉक से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां भारी बारिश के कारण रास्ते बाधित होने के चलते एक महिला को अपने चाचा के पार्थिव शरीर को पांच किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ा। चक्रवात ‘अरनब’ के प्रभाव से हुई भारी बारिश के कारण सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।

अस्पताल से घर लाते समय आई बाधा
मिली जानकारी के अनुसार, आलिया गांव के रहने वाले शंकर करजी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थे। उनकी भतीजी ललिता प्रधान ने उन्हें इलाज के लिए दो अक्टूबर को बेरहमपुर जनरल अस्पताल में भर्ती कराया था, जिसके बाद 18 अक्टूबर को बेहतर इलाज के लिए उन्हें कटक जनरल अस्पताल रेफर किया गया था। कटक में इलाज के दौरान 29 अक्टूबर को उनका निधन हो गया।
निधन के बाद एम्बुलेंस के जरिए शव को कटक से उनके पैतृक गांव आलिया लाया जा रहा था। हालांकि, खराब मौसम और भारी बारिश के कारण तड़कासाही के पास सड़क क्षतिग्रस्त होने के चलते एम्बुलेंस आगे नहीं बढ़ पाई और वहीं फंस गई। गांव से इस जगह की दूरी करीब पांच किलोमीटर थी।
महिला ने तय की पांच किलोमीटर की दूरी
परेशानियों के बीच ललिता प्रधान ने साहस दिखाते हुए बारिश और तेज हवाओं के बीच अपने चाचा के शव को कंधों पर उठाया और पांच किलोमीटर का सफर तय कर गांव तक पहुंची। इसके बाद पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ललिता पात्रापुर क्षेत्र की एक जानी-माने आदिवासी नेता हैं और वह गंजाम जिला विशेष विकास परिषद की उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत हैं। उन्होंने इस कठिन परिस्थिति को याद करते हुए बताया कि उन्होंने चक्रवात के दौरान दिन-रात मेहनत करके अपने इलाके के लोगों की सेवा की थी, लेकिन वह अपने चाचा के अंतिम समय में उनके साथ नहीं रह पाईं।
