अपने MISA इतिहास को साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं: एमके स्टालिन
डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें अपने MISA (मीसा) के तहत गिरफ्तारी को किसी के सामने साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी के पास भी उनके बलिदान का मूल्यांकन करने का अधिकार नहीं है।

द्रमुक के ‘मुप्पेरुम विझा’ (त्रि-वार्षिक उत्सव) को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि उनका मीसा इतिहास अन्नान चित्तिबाबू की जेल डायरी में दर्ज है, जो समय के पन्नों पर अमिट है। इसके अलावा, उन्होंने एमजीआर द्वारा गठित इस्माइल आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसने जेल की प्रताड़ना की जांच की थी। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का 75 साल से अधिक समय तक अपनी भव्यता बनाए रखना कोई आम बात नहीं है, और यह सफलता पार्टी के सिद्धांतों के कारण मिली है।
मौजूदा सरकार पर तीखे हमले
स्टालिन ने अपनी पार्टी की पिछली चुनावी हार का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उन्होंने सही दुश्मन की पहचान की होती, तो उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार केवल गठबंधन सहयोगियों के समर्थन से चल रही है और बिना विश्वास के हॉर्स-ट्रेडिंग में लगी हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा प्रशासन ने ‘द्रविड़ मॉडल’ के तहत शुरू की गई जन कल्याणकारी योजनाओं को या तो रोक दिया है या उनके नाम बदल दिए हैं।
विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे
राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए स्टालिन ने कहा कि परंदूर हवाई अड्डा परियोजना को रद्द किए जाने से तमिलनाडु का विकास करीब 25 साल पीछे चला गया है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार सत्ता में बनी रहती, तो महिलाओं को निश्चित मासिक सहायता और किसानों को नए इलेक्ट्रिक मोटर जैसे लाभ मिलते। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य में बढ़ती महंगाई और बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर भी मौजूदा प्रशासन पर जमकर निशाना साधा।
