फ्रांस और यूरोप के कई देशों में युवा आधारित प्रदर्शन, जीवनयापन के खर्च और शिक्षा मुख्य मुद्दे
फ्रांस में शनिवार को जीवनयापन के खर्च और शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर लगातार तीसरे सप्ताह भारी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश भर में बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई और राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों के मार्च के मार्गों में बदलाव किया गया।

फ्रांस में प्रदर्शन और सरकारी आंकड़े
सरकारी अनुमान के अनुसार, इस शनिवार देश भर में लगभग 3.20 लाख लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जो पिछले हफ्तों की तुलना में कम है। इससे पहले अक्टूबर के मध्य में हुए बड़े प्रदर्शनों में पांच लाख से अधिक लोग शामिल हुए थे। अधिकारियों ने हिंसक घटनाओं और तोड़फोड़ की आशंका के चलते कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे और पेरिस के मुख्य शहर से बाहर मार्च आयोजित करने के निर्देश दिए थे।
विभिन्न मांगें और छात्रों की आवाज
इन प्रदर्शनों में हाई स्कूल के छात्र, जलवायु कार्यकर्ता और महंगे जीवनयापन से परेशान आम लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में विभिन्न बैनर थे और उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, आवास और बेहतर सुविधाओं की मांग की। कुछ छात्रों ने खराब बुनियादी ढांचे और बदहाल परिसरों का भी जिक्र किया।

जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में रैलियां
फ्रांस के अलावा जर्मनी में भी ‘Gen Z regelt’ नामक युवा पहल के तहत कई शहरों में रैलियां निकाली गईं। इन प्रदर्शनों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु संरक्षण और सैन्य सेवा की वापसी के विरोध जैसे मुद्दे उठाए गए। इसके अलावा नीदरलैंड, स्पेन और इटली में भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं और कई जगहों पर एहतियाती कदम उठाए गए।
