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सात समंदर पार अमेरिका में भी जीवंत है हमारी मातृभाषा का प्रभाव

सात समंदर पार अमेरिका में भी जीवंत है हमारी मातृभाषा का प्रभाव

तेजी से बदलती हुई इस दुनिया में विवाह संस्कारों के नए-नए रूप देखने को मिलते हैं। इस प्रकार के बदलाव कई बार प्रसन्नता के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनते हैं। हाल ही में अमेरिका के सेंट लुइस शहर में एक विवाह समारोह में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। इस आयोजन के दौरान यह देखने को मिला कि समारोह की भव्यता में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं छोड़ी गई थी, और इसके साथ ही प्राचीन संस्कारों को बचाने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे थे।

सात समंदर पार अमेरिका में भी जीवंत है हमारी मातृभाषा का प्रभाव

विदेशों में भारतीय परंपराओं का संरक्षण

सुदूर अमेरिका जैसी जगह पर इस प्रकार के आयोजनों में भारतीय संस्कृति और संस्कारों का जीवित रहना इस बात का स्पष्ट आश्वासन देता है कि लोग आज भी हमारे ऋषि-मुनियों की प्राचीन परंपराओं को भूले नहीं हैं। वे अपनी जड़ों से पूरी तरह जुड़े हुए हैं और विदेशों में भी अपनी संस्कृति को सहेज कर रखने का प्रयास कर रहे हैं। इस पूरे आयोजन के दौरान एक विशेष बात ऐसी रही जिसने पूरी तरह से चौंका दिया और सोचने पर मजबूर कर दिया।

सिनेमा के गीतों में रची-बसी मातृभाषा

समारोह में शामिल होने वाले और वहां जश्न में नाच-गाने में पूरी तरह मशगूल रहने वाले अधिकांश युवा ऐसे थे जो ठीक-से हिंदी बोल नहीं पाते थे। उनकी बोलचाल में हिंदी का वह प्रवाह नहीं था, लेकिन इसके बावजूद हिंदी सिनेमा के गीतों के प्रति उनकी जानकारी, समझ और उनका असीम लगाव देखकर मातृभाषा के प्रति सम्मान और बढ़ गया। उन युवाओं को भले ही कई हिंदी शब्दों के सटीक अर्थ मालूम न हों, परंतु हिंदी के वे बोल उनकी रग-रग में पूरी तरह उतरे हुए थे।

सात समंदर पार अमेरिका में भी जीवंत है हमारी मातृभाषा का प्रभाव

उसी अद्भुत उत्साह और ऊर्जा के साथ वे सभी संगीत की धुनों पर नृत्य कर रहे थे। हाल ही में हमने हिंदी दिवस मनाया है। ऐसे में यह महसूस हुआ कि हमारी प्यारी मातृभाषा का एक रूप सात समंदर पार अमेरिका जैसी जगहों पर भी पूरी तरह से बना हुआ है और अपनी अनूठी छाप छोड़ रहा है।