Search for:
  • Home/
  • टेक्नोलॉजी/
  • मानवता के लिए एआई के खतरे: क्यों चिंतित हैं दुनिया भर के विशेषज्ञ
मानवता के लिए एआई के खतरे: क्यों चिंतित हैं दुनिया भर के विशेषज्ञ

मानवता के लिए एआई के खतरे: क्यों चिंतित हैं दुनिया भर के विशेषज्ञ

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते उपयोग और इसके संभावित खतरों को लेकर दुनिया भर में चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिका में लॉस एंजेलेस और न्यूयॉर्क सिटी जैसे कई जिलों के स्कूलों ने आने वाले शैक्षणिक सत्र में जनरेटिव एआई के उपयोग पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया है। शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि बिना उचित सुरक्षा मानकों के चैटजीपीटी जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने से छात्रों की सीखने की क्षमता और जटिल मानसिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।

मानवता के लिए एआई के खतरे: क्यों चिंतित हैं दुनिया भर के विशेषज्ञ

एजीआई और रिकर्सिव सेल्फ इम्प्रूवमेंट का जोखिम

दशकों पहले ऑक्सफोर्ड के एक दार्शनिक ने उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता में नैतिक मुद्दों को लेकर चेतावनी दी थी कि जब हम अपने से अधिक बुद्धिमान चीज बनाते हैं, तो उसके उद्देश्य हमारे लक्ष्यों के अनुरूप होने चाहिए। वर्तमान समय में सिलिकॉन वैली के विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी एजीआई विकसित कर लिया है, जो इंसानों की तरह बौद्धिक कार्य कर सकता है। इसके अलावा, रिकर्सिव सेल्फ इम्प्रूवमेंट के तहत कंप्यूटर प्रोग्रामर्स की बजाय अपने नए संस्करण खुद तैयार करने लगे हैं, जिससे बुद्धिमत्ता में भारी विस्फोट होने का खतरा पैदा हो गया है।

मानवता के लिए एआई के खतरे: क्यों चिंतित हैं दुनिया भर के विशेषज्ञ

नियंत्रण खोने का डर और एआई सुरक्षा

हालिया शोध और किताबों में भी इस बात की चेतावनी दी गई है कि यदि मशीनें इंसानों से अधिक बुद्धिमान हो जाती हैं, तो उन पर से नियंत्रण समाप्त हो सकता है। आधुनिक एआई सिस्टम्स भारी मात्रा में डेटा और कंप्यूटिंग शक्ति पर आधारित होते हैं, लेकिन इंसान इनके आउटपुट और उभरते व्यवहार को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि सुपर-इंटेलिजेंट मशीनें मानवीय मूल्यों को पूरी तरह नहीं अपनाएंगी और उनके अपने लक्ष्य इंसानी अस्तित्व के विपरीत हो सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया भर के नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं का ध्यान इस गंभीर खतरे की ओर आकर्षित हो रहा है।