युवाओं के लिए अंगद और अभिमन्यु के प्रेरणादायक आदर्श
संसार अनादिकाल से ही युवाओं में भविष्य की संभावनाएं देखता आया है। दुनिया भर के युवाओं की स्थिति में कुछ समानताएं हो सकती हैं, परंतु भारत की युवा-अवस्था का स्वरूप कुछ विशेष महत्व रखता है। इसका मुख्य कारण यह है कि यहां शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की संभावना और उसका आग्रह आज भी देश के रज-रज और कण-कण में विद्यमान है। शिक्षा का प्रसार तो संपूर्ण संसार में तेजी से फैल रहा है, लेकिन संस्कारों के महत्व को बनाए रखना भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है।

मानवता के भविष्य के प्राण
युवाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को आगे बढ़ाते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरी जी ने कहा है कि अब मानवता के भविष्य के प्राण केवल युवा ही हैं। आज के दौर में युवाओं की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि वे समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं। उनकी ऊर्जा और क्षमताओं का सही उपयोग संपूर्ण मानवता के हित में हो सकता है, बशर्ते उन्हें उचित मार्गदर्शन और वैचारिक आधार मिले।
अंगद और अभिमन्यु: युवाओं के आदर्श प्रतीक
भारतीय ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में ऐसे कई चरित्र मिलते हैं जो आज की पीढ़ी का मार्गदर्शन कर सकते हैं। रामायण के पात्र अंगद और महाभारत के पात्र अभिमन्यु को युवाओं के लिए दो प्रमुख आदर्श प्रतीक माना गया है। इन दोनों ही पात्रों के जीवन से युवाओं को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। रावण के दरबार में अंगद द्वारा पैर जमाए जाने की घटना को दुनिया की सबसे पहली युवा धर्म-संसद के रूप में देखा जा सकता है। अंगद ने रावण की सभा में जिस प्रकार साहस और दृढ़ता का परिचय देते हुए अपना पैर ठोका था, उसकी धमक को आज के युवाओं को भी समझने और सुनने की आवश्यकता है।

महाभारत के अभिमन्यु अपने जीवन में कुछ अधूरे रह गए थे, लेकिन अंगद ने अपने कार्य को पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया था। इन दोनों ही महान पात्रों के जीवन का उद्देश्य और उनका संदेश यही है कि हमारे देश और दुनिया के युवा अंगद और अभिमन्यु की तरह पूरी तरह निर्भय बनें और अपने संस्कारों को हमेशा अपने जीवन में संजोकर रखें। निर्भीकता और संस्कारों का यह संगम युवाओं को हर क्षेत्र में सफलता और मजबूती प्रदान कर सकता है।
