काला सागर और ऊर्जा सुरक्षा: कीव ने नई दिल्ली के युद्धविराम प्लान को सराहा
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रमुख ने नई दिल्ली द्वारा पेश किए गए युद्धविराम खाके को सबसे विस्तृत और व्यापक बताया है। इस कूटनीतिक पहल में प्रमुख रूप से ऊर्जा संयंत्रों और काला सागर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाने के उपाय सुझाए गए हैं। इस घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों में तुलनात्मक स्थिति
कीव में हुई एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी सामने आई कि यूक्रेन को विभिन्न देशों से चार अलग-अलग शांति योजनाएं प्राप्त हुई हैं। इन प्रस्तावों को पेश करने वाले देशों में भारत के अलावा तुर्की, मिस्र और अमेरिका भी शामिल हैं। यूक्रेनी पक्ष का मानना है कि अन्य देशों के प्रस्ताव सीमित दायरा रखते हैं, जैसे तुर्की और मिस्र के सुझाव मुख्य रूप से खाद्य आपूर्ति और अनाज मार्गों पर केंद्रित हैं, और अमेरिकी प्रस्ताव का मुख्य फोकस ऊर्जा सुरक्षा पर है। इसके विपरीत, भारतीय प्रस्ताव सभी प्रमुख पहलुओं को एक साथ समेटे हुए है।
बातचीत और संवाद के जरिए समाधान की वकालत
इससे पहले रूसी नेतृत्व ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्यस्थता और शांति प्रयासों की मुक्तকंठ से प्रशंसा की थी। भारत का यह निरंतर रुख रहा है कि संघर्ष का स्थायी हल केवल संवाद और कूटनीतिक बैठकों के जरिए ही संभव है। भारतीय पक्ष ने वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन की बाधाओं और ऊर्जा संकट के प्रभावों को लगातार उठाया है। वैश्विक कूटनीति में भारत की स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि वह संघर्षरत दोनों पक्षों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल है।
