बढ़ते वैश्विक कर्ज पर आरबीआई गवर्नर की चेतावनी, अर्थव्यवस्था के लिए गिनाए पांच बड़े खतरे
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कोविड महामारी के बाद से दुनिया भर में बढ़ते कर्ज के स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को आगाह करते हुए कहा कि वर्तमान वित्तीय स्थिरता को देखकर निश्चिंत नहीं बैठना चाहिए क्योंकि आज की मजबूती कल की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

वैश्विक कर्ज और अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के दौरान वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर चर्चा करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक कर्ज को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पश्चिम एशिया के संघर्ष के प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि हालांकि इस झटके को फिलहाल सहन कर लिया गया है, लेकिन मौजूदा चुनौतीपूर्ण माहौल ने मुद्रास्फीति के दबाव और व्यवस्था की कमजोरियों को बढ़ा दिया है। भारत के पिछले दो दशकों के अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय संकट अचानक पैदा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने में लंबा और कष्टदायक समय लगता है।
अर्थव्यवस्था के समक्ष पांच प्रमुख जोखिम
संजय मल्होत्रा ने वैश्विक वित्तीय ढांचे को प्रभावित करने वाले पांच बड़े जोखिमों की सूची साझा की है। ये खतरे अलग-अलग भले ही अभी बहुत बड़े न लगें, लेकिन इनका एक साथ मिलना अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता है:
- बढ़ता हुआ वैश्विक कर्ज स्तर
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किया जाने वाला परिसंपत्ति मूल्यांकन
- सामान्य से काफी अधिक लीवरेज या कर्ज की स्थिति
- प्राइवेट क्रेडिट से जुड़े मामले
- बढ़ते साइबर जोखिम
सरकारों और बैंकों पर असर
गवर्नर ने समझाया कि जीडीपी के मुकाबले कर्ज का अनुपात बढ़ने और सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल सख्त होने से सरकारों के लिए उधारी महंगी हो गई है। इससे राजकोषीय गुंजाइश कम होती है और कंपनियों के लिए भी कर्ज चुकाना कठिन हो जाता है। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस मामले में अपना सतर्क रुख जारी रखेगा, हालांकि टोकनाइजेशन जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
