संभल मस्जिद सर्वे मामला: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा
शीर्ष अदालत ने संभल की शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद के सिलसिले में निचली अदालत द्वारा दिए गए सर्वे के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है। इस मामले में बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

जामा मस्जिद समिति की याचिकाएं
यह पूरा कानूनी मामला संभल स्थित जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति द्वारा दाखिल की गई दो याचिकाओं से जुड़ा हुआ है। इन याचिकाओं में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस निर्देश को सही ठहराया था जिसमें मस्जिद परिसर के सर्वे के लिए कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की गई थी और मुकदमे को विचारणीय माना था।
अदालत में विभिन्न पक्षों की दलीलें
न्यायालय की कार्यवाही के दौरान मस्जिद समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनी बात रखी, जबकि हिंदू पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने भी दलीलें पेश कीं। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी पक्ष के दावों में उलझना नहीं चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों का जिक्र किया।
उपासना स्थल अधिनियम और पिछला आदेश
उल्लेखनीय है कि 1991 का यह कानून किसी भी उपासना स्थल के स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है और 15 अगस्त 1947 को मौजूद स्थिति को बनाए रखने का प्रावधान करता है। सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि इस कानून की व्याख्या से जुड़ा मुद्दा पहले से ही शीर्ष अदालत की एक बड़ी पीठ के विचाराधीन है। इससे पहले दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की अदालतों को धार्मिक स्थलों से जुड़े नए मुकदमे दर्ज करने और प्रभावी आदेश पारित करने पर रोक लगाई थी।
