कराची बंदरगाह पर फंसे छह भारतीय नाविक, महीनों से घर वापसी का इंतजार कर रहे परिवार
पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर एक जनरल कार्गो जहाज पर फंसे छह भारतीय नाविकों के परिवार गहरे संकट में हैं और उनकी सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले विनीत किशोर मिश्रा समेत कुल छह भारतीय नागरिक महीनों से इस बंदरगाह पर फंसे हुए हैं और उनकी वापसी को लेकर स्थिति पूरी तरह से अनिश्चित बनी हुई है। विनीत के परिवार ने उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से लगातार मदद की अपील की है।

कैसे फंसे नाविक और क्या हैं जहाज के हालात?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विनीत किशोर मिश्रा 25 फरवरी को इस जहाज पर बतौर चीफ ऑफिसर सवार हुए थे। ईरान और ओमान के समुद्री रास्तों से होते हुए यह जहाज 17 अप्रैल को पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर पहुंचा था। कराची पहुंचते ही एक ईरानी कंपनी और बंदरगाह के अधिकारियों के बीच हुए विवाद के चलते इस जहाज को जब्त कर लिया गया। इसके बाद से जहाज की बिजली आपूर्ति काट दी गई और सभी नाविकों के पासपोर्ट भी जब्त कर लिए गए।
फंसे हुए नाविकों के अनुबंध और वीजा की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जहाज से साइन ऑफ करने या नीचे उतरने की अनुमति नहीं दी जा रही है। परिवारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से जहाज पर पूरी तरह से बिजली गुल है, जिसके कारण वे अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा, नाविकों को भोजन संबंधी गंभीर कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ रहा है, जिसमें समय पर खाना न मिलना और बेहद सीमित मात्रा में चीजें मिलना शामिल है।
परिजनों की गुहार और सरकारी कार्यालयों के चक्कर
विनीत मिश्रा की पत्नी नेहा मिश्रा और उनके पिता ललित किशोर मिश्रा ने इस मामले में कई राज्य और केंद्रीय अधिकारियों से संपर्क साधा है। परिवार का कहना है कि पाकिस्तान में भारतीय दूतावास के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया था, लेकिन वहां से कोई सहायता नहीं मिल सकी। इसके बाद परिवार ने दिल्ली आकर प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय और विदेश मंत्रालय का दौरा किया है तथा अपने आवेदन जमा किए हैं।
परिवारों का यह भी कहना है कि उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है। विनीत की पत्नी और उनके दो छोटे बच्चे लगातार इस बात से परेशान हैं और अपने पिता की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं। परिजनों की एकमात्र मांग है कि सरकार जल्द से जल्द हस्तक्षेप करे और इन सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित उनके घर वापस लाए।
