छितौनी गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान हुई श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला की चर्चा
वाराणसी जिले के लोहता क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छितौनी गांव में इन दिनों धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन चल रहा है। यहां श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दूर-दराज से पहुंचे आचार्यों द्वारा कथा का रसपान कराया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन के माध्यम से ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला जा रहा है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।

पांचवें दिन आचार्य शुभम् कृष्ण महाराज का प्रवचन
धार्मिक अनुष्ठान के पांचवें दिन कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं रहीं। वृंदावन धाम से पधारे आचार्य शुभम् कृष्ण महाराज ने व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला का बहुत ही मनमोहक और सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बालकृष्ण अपने सखाओं यानी मित्रों के साथ मिलकर गोकुल में गोपियों के घरों में प्रवेश करते थे और माखन चुराया करते थे। इस प्रसंग को सुनकर वहां मौजूद सभी भक्त आनंदित हो रहे थे।
पकड़े जाने पर श्रीकृष्ण के अनूठे बहाने
कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य ने बताया कि गोपियों के घर माखन चुराते वक्त जब बालकृष्ण कभी पकड़े जाते थे, तो वे अपनी बाल सुलभ बुद्धि से तरह-तरह के अनोखे और मासूम बहाने बनाते थे। इस प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर विशेष सांस्कृतिक और भक्ति माहौल बन गया। जब ‘मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो’ जैसी प्रसिद्ध पंक्तियों और भजनों की प्रस्तुति हुई, तो वहां बैठे सभी श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे। इसके साथ ही भक्तों ने गोपाल द्वारा गाय चराने की लीला का भी आनंद लिया और कथा के माध्यम से अध्यात्मिक अमृत का पान किया।
मुख्य यजमान और श्रद्धालुओं की उपस्थिति
इस पावन और भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और यजमानों का विशेष योगदान रहा। कथा के पांचवें दिन मुख्य यजमान के रूप में ओमप्रकाश सिंह उपस्थित रहे। इसके अलावा कमलेश सिंह, जिन्हें कम्मल के नाम से भी जाना जाता है, तथा शोभनाथ सिंह जैसे गणमान्य लोग भी इस आयोजन में विशेष रूप से शामिल हुए। इन सभी ने विधि-विधान से कथा का श्रवण किया और कार्यक्रम में उपस्थित अन्य श्रद्धालुओं के साथ मिलकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस धार्मिक अनुष्ठान से छितौनी गांव का पूरा परिवेश पूरी तरह से भक्तिमय बना हुआ है।
