Search for:
  • Home/
  • राजनीति/
  • वोट चोरी के आरोपों पर राष्ट्रपति ने नहीं किया इनकार, राहुल गांधी का बड़ा दावा
वोट चोरी के आरोपों पर राष्ट्रपति ने नहीं किया इनकार, राहुल गांधी का बड़ा दावा

वोट चोरी के आरोपों पर राष्ट्रपति ने नहीं किया इनकार, राहुल गांधी का बड़ा दावा

विपक्षी दलों के नेताओं ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग की। विपक्षी नेताओं ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने का प्रयास किया और इस दौरान राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। इस प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी और उमर अब्दुल्ला जैसे आईएनडीआईए गठबंधन के वरिष्ठ नेता शामिल रहे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नेताओं को विजय चौक पर रोका गया, जिसके बाद चुनिंदा नेताओं ने राष्ट्रपति से मिलकर अपनी बात रखी।

वोट चोरी के आरोपों पर राष्ट्रपति ने नहीं किया इनकार, राहुल गांधी का बड़ा दावा

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी का बयान

मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दावा किया कि राष्ट्रपति ने उनके द्वारा उठाए गए वोट चोरी और चुनाव चोरी के आरोपों से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने इन आरोपों को नकारने के बजाय इसके सबूत मांगे हैं और विपक्ष जुटाए गए सभी सबूत उनके समक्ष प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। राहुल गांधी ने यह भी घोषणा की कि इस गंभीर मामले में आगामी सोमवार को विपक्षी दलों के नेता सुप्रीम कोर्ट जाकर भी ज्ञापन सौंपेंगे, ताकि वोट चोरी के खिलाफ कोई भी विकल्प छोड़ा न जाए।

मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं के विचार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वोट चोरी और लोकतंत्र को कमजोर किए जाने को लेकर उठ रही जनता की आवाज को राष्ट्रपति ने बेहद गंभीरता से सुना और मामले की छानबीन कर जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस बात की पुष्टि की कि विपक्षी दल देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी की आवाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वोट चोरी के आरोपों पर राष्ट्रपति ने नहीं किया इनकार, राहुल गांधी का बड़ा दावा

विपक्ष की प्रमुख मांगें और आरोप

राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में विपक्षी गठबंधन ने कई मुख्य मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा और 2023 के उस कानून को रद्द करना शामिल है जो चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, एसआईआर को तुरंत रद्द कर मतदाता सूची से अवैध रूप से हटाए गए सभी 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने, सभी चुनावों में पुनः बैलेट पेपर प्रणाली लागू करने तथा पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की गई है जिनमें वोट चोरी के पक्के सबूत पेश किए गए हैं।

विपक्ष का यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चुनाव प्रणाली को कमजोर किया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र की नींव हिल रही है। विपक्ष का कहना है कि संस्थाओं को अपनी जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और राष्ट्रपति इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए बिना किसी देरी के आवश्यक कार्रवाई करें।