पीएम मोदी ने की मोहन भागवत के विजयदशमी भाषण की सराहना, राष्ट्रीय एकता और सेवा पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित विजयदशमी उत्सव में संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की जमकर सराहना की है। उन्होंने नागपुर में दिए गए इस भाषण को बेहद प्रेरणादायक करार देते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

आरएसएस के शताब्दी वर्ष और विजयदशमी उत्सव पर संबोधन
नागपुर के रेशमीबाग मैदान में आयोजित इस वार्षिक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख ने अपने संबोधन के दौरान देश के महान संतों और महापुरुषों के योगदान को याद किया। उन्होंने समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए संतों के कार्यों का विशेष उल्लेख किया। संघ प्रमुख ने बताया कि संगठन पिछले एक सदी से देश में आत्म-जागृति पैदा करने और भारत की एकता व अखंडता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
पंच परिवर्तन और सेवा की भावना
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया संदेश में संघ स्वयंसेवकों की सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत द्वारा उल्लेखित ‘पंच परिवर्तन’ का विचार समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में बहुत सार्थक साबित हो सकता है। इस रूपरेखा के तहत आत्म-जागृति और स्वदेशी अपनाने जैसी अवधारणाओं पर विशेष बल दिया गया है, जो देश के नागरिकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाती हैं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन नागपुर में केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। स्थापना के बाद से ही यह संगठन हर वर्ष विजयदशमी का पर्व मनाता आ रहा है और इस बार इसके शताब्दी वर्ष का विशेष आयोजन संपन्न हुआ है।
