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CJP नेताओं की हिरासत पर के. अन्नामलाई ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना

CJP नेताओं की हिरासत पर के. अन्नामलाई ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना

तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की बार-बार बढ़ाई जा रही न्यायिक हिरासत देश में कानून के शासन को लेकर गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

CJP नेताओं की हिरासत पर के. अन्नामलाई ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना

पुलिस की कार्रवाई और कानून के शासन पर चिंता

पत्रकारों से बातचीत करते हुए के. अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि भले ही उनके विरोध जताने के तरीकों या हरकतों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जो अहम सवाल वे उठा रहे हैं, उस मामले में वह पूरी तरह से CJP के साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कानून को अपने हाथ में ले लिया है, जो कि बिल्कुल सही नहीं है।

सरकार से जवाब की मांग और नेताओं की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया

अन्नामलाई ने आगे कहा कि सरकार को जनता और इन नेताओं द्वारा उठाए जा रहे सवालों के जवाब देने चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी नियम के उल्लंघन के आरोप में बार-बार गिरफ्तार करना और जेल में उन्हें परेशान करने से केवल CJP के नेता और अधिक मजबूत होकर उभरेंगे। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में दिल्ली पुलिस का रवैया गलत रहा है।

राहुल गांधी और संस्थाओं की भूमिका पर बयान

इस दौरान उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया। अन्नामलाई का कहना था कि राहुल गांधी को एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार प्राप्त है, लेकिन ऐसा करते समय देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

अदालत में मामले की स्थिति

उल्लेखनीय है कि दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत अवधि को दो दिनों के लिए और बढ़ा दिया था। इन नेताओं पर जंतर-मंतर परिसर के भीतर प्रवेश करने और अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे पुलिस कर्मियों के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का भी रुख किया है।