संयुक्त राष्ट्र जलवायु पैनल ने विज्ञान रिपोर्टों पर गतिरोध खत्म करने का किया आह्वान
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ जलवायु पैनल ने अपनी आगामी वैज्ञानिक रिपोर्टों के प्रकाशन को लेकर बने गतिरोध को सुलझाने के उद्देश्य से एक बैठक का आयोजन किया है। इस बैठक में जलवायु विज्ञान की रिपोर्टों के समय निर्धारण पर विभिन्न देशों के बीच चल रहे कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करने पर जोर दिया गया है।

सातवीं मूल्यांकन रिपोर्ट पर गतिरोध
इंटरपोलिटिकल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की ओर से जारी होने वाली वैज्ञानिक रिपोर्टें वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मानक मानी जाती हैं। हालांकि, इसके अगले बड़े रिपोर्ट सेट के समय को लेकर देशों के बीच असहमति देखने को मिल रही है। कुछ यूरोपीय देश चाहते हैं कि यह रिपोर्ट वर्ष 2028 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन से पहले आ जाए, ताकि वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के प्रयासों की समीक्षा की जा सके।
दूसरी ओर, सऊदी अरब, चीन और भारत जैसे देशों का रुख है कि ‘सातवीं मूल्यांकन रिपोर्ट’ के प्रकाशन को वर्ष 2029 तक के लिए टाल दिया जाना चाहिए। रिपोर्टों में देरी का समर्थन करने वालों का तर्क है कि हजारों पन्नों के तकनीकी वैज्ञानिक निष्कर्षों को समझने और उनका अध्ययन करने के लिए विशेष रूप से विकासशील देशों को अधिक समय की आवश्यकता है।
अध्यक्ष का बयान और भविष्य की दिशा
अदीस अबाबा में चल रही इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, IPCC के अध्यक्ष जिम स्की ने समय के मुद्दे पर अभी भी एक बड़ी खाई बने होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने सदस्य सरकारों से इस सप्ताह आम सहमति बनाने और एक स्पष्ट निर्णय पर पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पैनल का यह निर्णय संगठन की कार्यप्रणाली और उसकी प्रतिष्ठा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उल्लेखनीय है कि IPCC के ये मूल्यांकन हर पांच से सात वर्षों के अंतराल पर प्रकाशित किए जाते हैं, जिन्हें तैयार करने में हजारों वैज्ञानिक स्वेच्छा से अपना योगदान देते हैं।
