भूटान यात्रा का अनुभव: सकल राष्ट्रीय खुशी और जीवनशैली की एक अनूठी झलक
पश्चिम बंगाल के जयगांव शहर से सटी सीमा पार करते ही एक बिल्कुल शांत और व्यवस्थित दुनिया की शुरुआत होती है। पर्वतों की गोद में बसे इस नन्हे देश में प्रवेश करते ही शोरगुल से दूर एक अलग सुकून का अहसास होता है।

प्रकृति संरक्षण और अनूठी जीवनशैली
भूटान में पेड़ों को काटना सख्त मना है और वहां के लोग पर्यावरण संरक्षण के नियमों का गंभीरता से पालन करते हैं। करीब पचास साल पहले वहां के शासक ने तय किया था कि देश भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-दौलत के फेर में नहीं पड़ेगा। इसके बजाय उन्होंने ‘सकल राष्ट्रीय खुशी’ यानी ग्रॉस डोमेस्टिक हैप्पीनेस के विचार को अपनाया। प्रगति और विकास का पैमाना केवल पैसों को नहीं माना गया, बल्कि नागरिकों की प्रसन्नता को प्राथमिकता दी गई।
नियम और सामाजिक समानता
वहां की जीवनशैली काफी अनुशासित है, जहां कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय पोशाक पहनना अनिवार्य है। घरों की बनावट और शैली भी एक जैसी होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वहां सामाजिक ऊंच-नीच कम है और भ्रष्टाचार का नामोनिशान नहीं है। राजा भी आम नागरिकों की तरह साधारण जीवन जीते हैं और देशवासियों की सेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं।

युवाओं की सोच और वापसी
भूटान के कई नागरिकों को संतोषजनक और अच्छी जिंदगी गुजारते देखा गया है, हालांकि इंटरनेट के जरिए बाहरी दुनिया से जुड़ रहे कुछ नौजवानों में आधुनिक चकाचौंध के प्रति आकर्षण भी देखा जाता है। इस अनोखे और शांत सफर की यादों को समेटते हुए जब दोबारा भारतीय सीमा में प्रवेश किया जाता है, तो धूल-पसीने और धूम-धड़ाके के बीच यहां की अपनी एक अलग ऊर्जा और विविधता महसूस होती है।
