कम बारिश और अल नीनो का असर: देश में घट सकता है चावल का उत्पादन
इस बार मानसून के दौरान कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव के चलते देश में धान के उत्पादन में करीब एक करोड़ टन की कमी आने की आशंका है। मौसम की बेरुखी और फसल पकने के समय नमी की कमी के कारण प्रति हेक्टेयर पैदावार पर बुरा असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया है। कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, इस वर्ष चावल का कुल उत्पादन लगभग 14.4 करोड़ टन रहने की संभावना है, जबकि पिछले साल यह रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन दर्ज किया गया था।

धान के रकबे और बुवाई में आई गिरावट
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल धान की खेती का रकबा पिछले वर्ष के 445.92 लाख हेक्टेयर से घटकर 429.28 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसका मतलब है कि लगभग 16.64 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में धान की बुवाई हो सकी है, जो कुल मिलाकर करीब 3.73 प्रतिशत की गिरावट है। चूंकि खरीफ सीजन में उगाया जाने वाला धान देश के कुल चावल उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है, इसलिए रकबे में आई यह कमी सीधे तौर पर कुल पैदावार पर दबाव बढ़ा रही है।
अन्य खरीफ फसलों पर भी पड़ा प्रभाव
कमजोर मानसून की मार केवल धान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खरीफ फसलों का रकबा भी इससे प्रभावित हुआ है। इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा घटकर 1103.90 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 1118.95 लाख हेक्टेयर था। आंकड़ों के अनुसार मक्का, सोयाबीन और मूंग के रकबे में कमी दर्ज की गई है, हालांकि कुछ दालों जैसे अरहर और उड़द में बढ़ोतरी भी देखी गई है। देश के सैकड़ों जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज किए जाने के कारण कृषि क्षेत्र को इन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी बफर स्टॉक से राहत की उम्मीद
उत्पादन घटने के अनुमान के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि देश में पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है। सितंबर महीने तक विभिन्न राज्यों के पास करीब 5.96 करोड़ टन चावल का सरकारी भंडार उपलब्ध था, जो जरूरत की मात्रा से काफी अधिक है। इस पर्याप्त भंडार के कारण उत्पादन में कमी आने के बावजूद घरेलू बाजार में आपूर्ति तुरंत बाधित होने की संभावना नहीं है, हालांकि कीमतों और निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है।
