छत्तीसगढ़: उफनती नदियां पार कर स्कूल पहुंचती हैं महिला शिक्षक, कलेक्टर ने की सराहना
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में शिक्षा के प्रति एक मिसाल पेश करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल की महिला शिक्षक अपनी छोटी बच्ची के साथ रोजाना खतरनाक रास्तों और उफनती नदियों को पार करके बच्चों को पढ़ाने जाती हैं। उनकी इस लगन और कर्तव्यनिष्ठा की जिला कलेक्टर ने भी सराहना की है।

कठिन परिस्थितियों में भी जारी है शिक्षा
वल्रामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक के अंतर्गत धौरपुर प्राथमिक विद्यालय में तैनात महिला शिक्षक हर साल मानसून के मौसम में अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचती हैं। इस क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के कारण मोरान और इरिया नदियां उफान पर रहती हैं। इसके बावजूद, शिक्षक अपने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए हर दिन इन कठिनाइयों का सामना करती हैं।
स्कूल और बच्चों की स्थिति
जानकारी के अनुसार, धौरपुर एक दूरदराज का छोटा सा क्षेत्र है जहां लगभग 10 से 15 परिवार ही रहते हैं। स्थानीय बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार ने वर्ष 2005 में इस प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की थी। वर्तमान में इस विद्यालय में कुल नौ छात्र और दो महिला शिक्षक कार्यरत हैं। दोनों शिक्षिकाएं बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए हर साल बरसात के दिनों में इस कठिन यात्रा को तय करती हैं।
कलेक्टर ने की सराहना
शिक्षकों के इस समर्पण और निष्ठा को देखते हुए बलरामपुर के कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने उनकी प्रशंसा की है। शिक्षकों का कहना है कि उनके लिए विद्यार्थियों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है, और वे यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि अकादमिक रूप से बच्चे पीछे न छूट जाएं। शिक्षिकार्मिला टोप्पो, जो वर्ष 2014 से यहां तैनात हैं, हर साल मानसून के दौरान इन नदियों को पार कर अपने कर्तव्य का पालन करती आ रही हैं।
