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उत्तरकाशी के मोरी में हनी मिशन योजना के तहत बांटी गई सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल

उत्तरकाशी के मोरी में हनी मिशन योजना के तहत बांटी गई सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल

उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की हनी मिशन योजना के तहत लाभार्थियों को वितरित किए गए बी-बॉक्स, मधुमक्खी कॉलोनियों और टूल किट की गुणवत्ता गंभीर जांच के दायरे में आ गई है। भद्रासू, नानाई, सुनकुंडी और पांव तल्ला क्षेत्र के लाभार्थियों ने इस वर्ष फरवरी में बांटी गई सामग्री में कई प्रकार की खामियां होने के आरोप लगाए हैं। इस मामले में लगातार शिकायतों और पत्राचार के बाद अब विभागीय अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया है।

उत्तरकाशी के मोरी में हनी मिशन योजना के तहत बांटी गई सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल

कॉलोनियों और बी-बॉक्स की गुणवत्ता पर तकनीकी आपत्तियां

लाभार्थियों का मुख्य आरोप है कि उन्हें उपलब्ध कराई गई कुछ मधुमक्खी कॉलोनियां मृत, सड़ी-गली अथवा बीमारी से प्रभावित थीं और कई कॉलोनियों में रानी मधुमक्खी भी नहीं पाई गई। इसके अलावा, पर्वतीय क्षेत्र की ठंडी जलवायु को ध्यान में रखते हुए बी-बॉक्स के प्रकार और मधुमक्खी प्रजाति को लेकर भी तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। जानकारों का कहना है कि मोरी जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए जो मानक और उपकरण जरूरी हैं, आपूर्ति में कथित तौर पर उन तकनीकी पहलुओं की अनदेखी की गई है।

टूल किट और अन्य उपकरणों में कमियों के दावे

मधुमेह पालन से जुड़े लाभार्थियों ने टूल किट के सामान पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि फ्रेम में निर्धारित मानकों के मुताबिक स्टेनलेस स्टील के तार नहीं लगाए गए और आवश्यक उपकरणों के स्थान पर सामान्य लोहे का सामान दे दिया गया। इसके साथ ही, बॉक्स के जॉइंट्स में खामियां होने और प्रत्येक बॉक्स के साथ दिए जाने वाले फीड बॉक्स उपलब्ध न कराए जाने की बात भी सामने आई है। बक्से पर KVIC का लोगो, नंबरिंग और वर्ष अंकित न होने का भी आरोप लगाया गया है।

उत्तरकाशी के मोरी में हनी मिशन योजना के तहत बांटी गई सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल

अधिकारियों और विशेषज्ञों का निरीक्षण और आगे की प्रक्रिया

सामग्री को लेकर लगातार उठ रही आवाजों के बाद KVIC के राज्य कार्यालय देहरादून के अधिकारियों, सप्लायर और विभिन्न स्थानों से आए तकनीकी विशेषज्ञों ने मोरी क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, मौसम और मधु प्रवाह की भी समीक्षा की गई। अब इस पूरी प्रक्रिया की तकनीकी रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजे जाने की उम्मीद है, जिसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई और वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।