सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से न्यायाधिकरणों में खाली पदों पर 25 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आगामी 25 सितंबर तक देश भर के न्यायाधिकरणों, विशेष रूप से ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों में खाली पड़े पदों की जानकारी देने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि समय पर नियुक्तियां न होने से आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

न्यायाधिकरणों में रिक्तियों पर शीर्ष अदालत की चिंता
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की विशेष पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें सदस्यों और पीठासीन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के कारण न्यायाधिकरणों के निष्क्रिय होने की आशंका जताई गई थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने माना कि यदि जल्द ही नए पद नहीं भरे गए, तो आर्थिक और पर्यावरणीय विवादों से पीड़ित लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों और एनजीटी पर असर
अदालत के समक्ष यह बात भी रखी गई कि कई ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों को अपने दैनिक कामकाज के संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील को 25 सितंबर तक सभी रिक्तियों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि कुल रिक्तियों की संख्या लगभग नब्बे है और चयन समिति इनमें से अधिकांश पदों की प्रक्रिया पर काम कर रही है।
इसके साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के तीन सदस्यों के सेवानिवृत्त होने से पर्यावरण मामलों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी संज्ञान लिया गया। न्यायहित में एक अंतरिम कदम उठाते हुए पीठ ने नियमित नियुक्तियां होने तक इन तीनों सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि न्यायिक कार्य बाधित न हों।
