सुप्रीम कोर्ट ने पीएफआई के पूर्व चेयरमैन ई. अबुबकर को दिल्ली के अस्पताल में इलाज की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के संस्थापक चेयरमैन ई. अबुबकर को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति प्रदान कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेष शर्तों का पालन करना होगा और इलाज का सारा खर्च उन्हें स्वयं उठाना होगा।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत की खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत मामलों में असंवेदनशील नहीं हो सकती और न्यायपालिका को संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता होती है। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्तियों की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्देश जारी किए।
एनआईए की शर्तें और निर्देश
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने सुझाव दिया था कि मरीज को एक सप्ताह के लिए साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भेजा जा सकता है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि अस्पताल के कमरे के बाहर पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, कोई बाहरी व्यक्ति नहीं मिल सकेगा और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी।
इलाज का खर्च और अन्य शर्तें
न्यायालय ने निर्देश दिया कि उपचार के दौरान एक परिवार का सदस्य उनके साथ रह सकता है, बशर्ते वह कोई आपत्तिजनक वस्तु साथ न रखे। इसके अलावा एस्कॉर्ट दल का खर्च भी याचिकाकर्ता को ही वहन करना होगा। अदालत ने अस्पताल से यह भी अनुरोध किया है कि वे मरीज की आगे की चिकित्सा स्थिति और संभावित अस्पताल में रुकने की अवधि को लेकर अपनी रिपोर्ट दाखिल करें।
स्वास्थ्य स्थिति और पिछला मामला
इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने ई. अबुबकर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। याचिकाकर्ता के स्वास्थ्य को लेकर यह जानकारी सामने आई थी कि वह सत्तर वर्ष से अधिक आयु के हैं, पार्किंसंस रोग से पीड़ित हैं और पूर्व में उनका कैंसर का ऑपरेशन भी हो चुका है। उन पर देश के खिलाफ गंभीर साजिश रचने से जुड़े आरोपों के तहत कार्रवाई की गई है।
