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आंतरिक शांति के लिए बाहरी इच्छाओं पर नियंत्रण क्यों है जरूरी?

आंतरिक शांति के लिए बाहरी इच्छाओं पर नियंत्रण क्यों है जरूरी?

जीवन में आंतरिक शांति और संतोष प्राप्त करने के लिए बाहरी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना बेहद आवश्यक है। पंडित विजयशंकर मेहता के अनुसार, हमारी इच्छाओं का जन्म अंदर से नहीं होता, बल्कि बाहरी चीजों को देखकर इनकी शुरुआत होती है। किसी सुंदर चेहरे या शानदार गाड़ी को देखकर जब हम उसे अपने भीतर उतार लेते हैं, तो मन में कामनाओं का निर्माण शुरू हो जाता है।

आंतरिक शांति के लिए बाहरी इच्छाओं पर नियंत्रण क्यों है जरूरी?

बाहरी आकर्षण और इच्छाओं का चक्र

जब बाहर की वस्तुएं या लोग हमारे मन के भीतर प्रवेश करते हैं, तो मन की चक्की उन्हें पीसकर इच्छाओं का रूप दे देती है। एक बार जब भीतर कामना का निर्माण हो जाता है, तो मनुष्य उसकी पूर्ति के लिए तमाम प्रयास करने लगता है। यदि इन इच्छाओं को जबरदस्ती दबाया जाए, तो वे शरीर या मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि बाहरी चीजों को देखकर उनके प्रति सही समझ विकसित की जाए।

आंतरिक रिक्ति को कैसे भरें

जब मन भीतर से खाली होता है, तो बाहरी साधन उसमें बहुत जल्दी जगह बना लेते हैं। इस रिक्ति को भरने के लिए भौतिक वस्तुओं की जगह आध्यात्मिकिकरण का सहारा लिया जा सकता है। यदि मन में ईश्वर की अनुभूति और नाम-जप का भराव हो, तो बाहर के साधन भीतर आकर किसी भी प्रकार की कामना को जन्म नहीं दे पाएंगे।

आंतरिक शांति के लिए बाहरी इच्छाओं पर नियंत्रण क्यों है जरूरी?
  1. बाहरी दृश्यों और वस्तुओं को देखकर उनके प्रति सजगता अपनाएं।
  2. यह समझें कि बाहरी वस्तुएं केवल बाहर की हैं, उन्हें मन में न बसाएं।
  3. ईश्वर स्मरण और आध्यात्मिक विचारों से मन के भीतर का खालीपन दूर करें।

जब भीतर वास्तविक रूप से परमात्मा की अनुभूति बस जाती है, तो वहां किसी भी प्रकार की कामना के लिए जगह नहीं बचती। मन को नियंत्रण में रखने के लिए बाहरी प्रलोभनों से दूरी बनाना और आंतरिक चेतना को मजबूत करना ही एकमात्र उपाय है।