Search for:
  • Home/
  • मध्य प्रदेश/
  • इंदौर में संपन्न हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन, नई कार्यकारिणी का हुआ गठन
इंदौर में संपन्न हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन, नई कार्यकारिणी का हुआ गठन

इंदौर में संपन्न हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन, नई कार्यकारिणी का हुआ गठन

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित अभिनव कला समाज सभागृह में प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह दो दिवसीय आयोजन 24 और 25 अक्टूबर को हुआ था, जिसमें देश और राज्य भर से डेढ़ सौ से अधिक लेखकों ने शिरकत की। सम्मेलन की शुरुआत से पहले ही देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत मालवी शैली में कबीर गायन के साथ किया गया। सम्मेलन के दौरान साहित्य की भूमिका, सांप्रदायिकता, फासीवाद, आदिवासी अधिकार, और जन सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीर विचार-मंथन किया गया।

इंदौर में संपन्न हुआ प्रगतिशील लेखक संघ का 14वाँ राज्य सम्मेलन, नई कार्यकारिणी का हुआ गठन

शब्द सृजन का माध्यम हैं, नफरत का नहीं

समारोह के पहले दिन उद्घाटन सत्र में प्रख्यात भाषाविद्, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता गणेश देवी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि शब्द केवल सृजन का माध्यम होते हैं और इनसे यह पूरी सृष्टि बनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शब्दों को कभी भी नफरत और हत्या का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने प्रतिरोध के इतिहास, वर्तमान समय की राजनीतिक चुनौतियों, सूफी संतों के योगदान, और हाशिए के समाज तथा साहित्य के संबंधों पर अपने विचार रखे। सत्र के दौरान विभिन्न स्मृतियों में पुस्तक प्रदर्शनियाँ और कविता पोस्टर प्रदर्शनियाँ भी लगाई गईं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय ख्याति की वायलिन वादक ने अपनी कला की प्रस्तुति दी।

वैचारिक प्रतिबद्धता और विचार-विमर्श

सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन ‘लेखक संगठन विचार और प्रतिबद्धता’ विषय पर गहन चर्चा हुई। विभिन्न जिलों और क्षेत्रों से आए साहित्यकारों ने हिस्सा लिया और फासीवाद तथा पूंजीवाद के गठजोड़ के खिलाफ लेखक संगठनों की भूमिका पर बात रखी। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि संगठन में संख्या से अधिक विचार और अनुशासन महत्वपूर्ण होना चाहिए तथा लोकतंत्र और असहमति का सम्मान किया जाना आवश्यक है। सत्रों के संचालन और उद्बोधन के माध्यम से लेखकों ने अपनी बात रखी और वर्तमान समय की राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता जताई।

नई कार्यकारिणी का मनोनयन और जनहित प्रस्ताव

सम्मेलन के अंतिम चरण में विचार-विमर्श के बाद नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें छिंदवाड़ा के वरिष्ठ कवि मोहन कुमार डहेरिया को प्रदेश अध्यक्ष और भोपाल के कवि अनिल करमेले को महासचिव मनोनीत किया गया। नवनियुक्त पदाधिकारियों ने संघ की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इसके अलावा, सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण जनहित प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किए गए, जिनमें केन-बेतवा नदी परियोजना के विस्थापितों के लिए न्याय की मांग, मणिपुर में शांति बहाली और विस्थापितों का पुनर्वास, आदिवासियों व वंचित तबकों पर अत्याचार के खिलाफ आवाज, शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद थोपने के विरोध, टेलीविजन पर अंधविश्वास फैलाने वाले कार्यक्रमों के विरुद्ध, तथा डमी स्कूलों के खिलाफ प्रस्ताव शामिल रहे। सम्मेलन के समापन पर साम्राज्यवादी शक्तियों के खिलाफ संघर्ष से एकजुटता व्यक्त करने के लिए एक फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।