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महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी

महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी

केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश कर इन्हें पारित कराने के लिए इस महीने के अंत में एक विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इस संभावित विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य इन विधेयकों को दोबारा सदन के सामने लाकर मंजूरी दिलाना है। सरकार का मानना है कि इस बार सदन के भीतर समीकरणों में आए बदलावों के चलते आवश्यक समर्थन जुटाया जा सकता है।

महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी

विशेष सत्र बुलाने के पीछे की मुख्य वजह

मुख्य चुनाव आयुक्त और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े घटनाक्रमों के बीच यह विशेष सत्र काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले बीते सत्र के दौरान 17 अप्रैल को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक (जिसमें परिसीमन भी शामिल था) निचले सदन में पारित नहीं हो सका था। अब सरकार इन सभी प्रावधानों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी है।

दो-तिहाई बहुमत का गणित और अंकों का खेल

संविधान संशोधन से जुड़े इन विधेयकों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 540 के हिसाब से इस जादुई आंकड़े को छूने के लिए लगभग 360 सीटों के समर्थन की जरूरत है। हालांकि एनडीए के पास साधारण बहुमत मौजूद है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए अतिरिक्त दलों के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है।

अन्य दलों के समर्थन की उम्मीद

पिछले सत्र के मुकाबले इस बार सत्ता पक्ष की स्थिति मजबूत हुई है। विभिन्न दलों के कई सांसदों के सत्ता पक्ष की ओर आने से संख्या बल में सुधार हुआ है। इसके अलावा, कुछ अन्य दलों जैसे एनसीपी (शरद पवार) के समर्थन की भी उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि चर्चा है कि सीटों में पचास प्रतिशत तक की पक्की बढ़ोतरी को इस विधेयक का हिस्सा बनाया जा सकता है। पार्टी नेताओं की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिलने की चर्चाएं हैं, जिससे सरकार को बिल पारित होने का पूरा भरोसा नजर आ रहा है।