Search for:
  • Home/
  • झारखंड न्यूज़/
  • झारखंड के पालगंज में ऐतिहासिक राजसरोवर को संवारने के लिए आगे आए ग्रामीण
झारखंड के पालगंज में ऐतिहासिक राजसरोवर को संवारने के लिए आगे आए ग्रामीण

झारखंड के पालगंज में ऐतिहासिक राजसरोवर को संवारने के लिए आगे आए ग्रामीण

गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखण्ड के पालगंज में राजतंत्र काल की यादों को समेटे ऐतिहासिक राजसरोवर को संरक्षित करने का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। इस प्राचीन जलस्रोत को नया स्वरूप देने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और राजघराने के वंशजों ने आपसी सहयोग से बीड़ा उठाया है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इस सरोवर की सुध लेकर ग्रामीणों ने समाज के सामने एक सराहनीय उदाहरण पेश किया है।

झारखंड के पालगंज में ऐतिहासिक राजसरोवर को संवारने के लिए आगे आए ग्रामीण

ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की अनूठी पहल

आधुनिक समय में जहां पारंपरिक जलस्रोत और पुरानी इमारतें अपनी पहचान खोती जा रही हैं, वहीं पालगंज के लोगों ने सरकारी सहायता का इंतजार किए बिना खुद ही आर्थिक सहयोग जुटाया है। देखरेख के अभाव में इस प्राचीन तालाब में काफी समय से गंदगी और गाद जमा हो गई थी, जिससे स्थानीय लोगों को काफी असुविधा हो रही थी।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

यह सरोवर केवल पानी की जरूरत को पूरा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की पुरानी राजपरंपरा और सामाजिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। खरगडीहा जमींदारी व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले पालगंज क्षेत्र में मौजूद इस सरोवर का विशेष महत्व है। गंदगी और गाद भरने के कारण दुर्गा पूजा और छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

भविष्य के लिए योजनाएं

सरोवर की साफ-सफाई के बाद इसका स्वरूप पूरी तरह निखर जाएगा, जिससे स्थानीय धार्मिक आयोजनों में आसानी होगी। ग्रामीणों की यह भी योजना है कि इस जलस्रोत की नियमित देखरेख की जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़ी रहें। समाज के लोगों का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना केवल प्रशासन का नहीं बल्कि हर नागरिक का सामूहिक दायित्व है।