Search for:
  • Home/
  • उत्तराखंड/
  • मुजफ्फरनगर कांड-94 की 32वीं बरसी: दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन
मुजफ्फरनगर कांड-94 की 32वीं बरसी: दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

मुजफ्फरनगर कांड-94 की 32वीं बरसी: दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

मुजफ्फरनगर कांड-94 के बत्तीस वर्ष बीत जाने के बाद भी दोषियों को सजा न मिलने से आक्रोशित उत्तराखंड के लोगों ने नई दिल्ली में काला दिवस मनाते हुए बलिदानियों को याद किया। आंदोलनकारियों ने पुलिस प्रशासन द्वारा जंतर-मंतर पर कार्यक्रम की अनुमति न दिए जाने के षडयंत्र को विफल करते हुए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सभागार में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।

मुजफ्फरनगर कांड-94 की 32वीं बरसी: दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

वर्ष 1994 में अलग राज्य के जनांदोलन के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुए अत्याचार के विरोध में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों के साथ-साथ उत्तराखंड बनने के बाद की सरकारों पर भी गंभीर आरोप लगाए। आंदोलनकारियों का कहना था कि उच्च न्यायालय और जांच एजेंसियों द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद दोषियों को उचित दंड मिलने के बजाय उन्हें संरक्षण और पदोन्नति दी गई, जो बेहद निराशाजनक है।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति को एक रौषयुक्त ज्ञापन भी प्रेषित किया गया, जिसमें न्याय व्यवस्था और संविधान की रक्षा के लिए इस जघन्य कांड के दोषियों को तत्काल सजा देने की गुहार लगाई गई। बैठक में उपस्थित प्रमुख लोगों ने राज्य के आत्मसम्मान और जनाकांक्षाओं की उपेक्षा किए जाने पर रोष प्रकट किया और हुतात्माओं के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुजफ्फरनगर कांड-94 की 32वीं बरसी: दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

उत्तराखंड राज्य गठन जनांदोलन के प्रमुख संगठनों व सामाजिक संगठनों ने समन्वय समिति के बैनर तले इस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर देश की न्याय व्यवस्था और अब तक की सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया जिसमें तत्कालीन अधिकारियों को दोषी ठहराया गया था।