खिलाड़ियों को कम आंकना सही नहीं: एशियाई खेलों में लवलीना बोरगोहाईं की ऐतिहासिक सफलता
भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहाईं ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है और देश का नाम रोशन किया है। उनकी इस बड़ी उपलब्धि ने उन सभी आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं जिन्होंने हाल ही में हुए टूर्नामेंटों के बाद उन पर नकारात्मक टिप्पणियां की थीं। किसी भी एथलीट के सफर में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन बिना पूरी बात समझे खिलाड़ियों की आलोचना करना उचित नहीं है।

राष्ट्रमंडल खेलों के बाद हुई थी आलोचना
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान लवलीना को करीबी मुकाबले का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया था। कई विश्लेषकों और खेल प्रेमियों ने उनके प्रदर्शन को लेकर नकारात्मक बातें फैलाई थीं, जबकि सच्चाई यह थी कि वह कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद पदक के साथ लौटी थीं। खेल में किस्मत और परिस्थितियों की अपनी भूमिका होती है, लेकिन इसके आधार पर किसी प्रतिभावान खिलाड़ी के करियर को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना गलत है।
मैच के दौरान पलटी बाजी
एशियाई खेलों के सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान शुरुआती दौर में स्थितियां थोड़ी कठिन लग रही थीं और लवलीना रक्षात्मक खेलती नजर आ रही थीं। हालांकि, कोच सैंटियागो नीवा के मार्गदर्शन और रणनीतिक बदलाव के बाद उन्होंने शानदार वापसी की। दूसरे राउंड से ही उन्होंने मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और आक्रामक खेल दिखाते हुए मैच का पासा पलट दिया।

ऐतिहासिक रहा है सफर
इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचकर लवलीना ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, क्योंकि इससे पहले महान मुक्केबाज मैरी कॉम भी दो बार फाइनल तक नहीं पहुंच सकी थीं। इसके बाद स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया में मनवा दिया। यह पूरी घटना खेल जगत और प्रशंसकों के लिए एक बड़ा सबक है कि खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाना चाहिए, न कि उन्हें हतोत्साहित करना चाहिए। यदि आप किसी एथलीट का समर्थन करने में असमर्थ हैं, तो कम से कम उनकी आलोचना करने से बचना चाहिए।
