ज्यूलिकोट दूषित पानी मामला: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिए अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
ज्यूलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल की समस्या से जुड़ी जनहित याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में अब तक दिए गए निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने इस मामले में मॉनिटरिंग कमेटी के निर्णयों से भी अवगत कराने को कहा है।

दूषित पेयजल से प्रभावित हुए थे लोग
बीते कुछ महीनों से नैनीताल के निचले हिस्सों के कई इलाकों में सीवर और जल स्रोत का पानी मिलने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके कारण गांजा, तल्ला छिंडा, मल्ला छिंडा, वीरभट्टी, ज्यूलिकोट और खुर्पाताल समेत कई क्षेत्रों में दूषित पानी की समस्या पैदा हो गई थी। जनहित याचिका में बताया गया कि इस दूषित पानी की वजह से बड़ी संख्या में लोग पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों से प्रभावित हुए थे। इस मामले को एक अधिवक्ता द्वारा जनहित याचिका के रूप में अदालत के समक्ष रखा गया है।
प्रशासन और सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि पानी की आपूर्ति की स्थिति में पहले से सुधार हुआ है और हालात नियंत्रण में हैं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि मरीजों की संख्या में भी कमी आई है। इसके अलावा, कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जल संस्थान और जल निगम के कुछ अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से यह भी बताया गया कि विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जा रही है।

अगली सुनवाई 29 सितंबर को
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे अगली सुनवाई के दौरान अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 29 सितंबर को तय की गई है, जिसमें मॉनिटरिंग कमेटी की कार्रवाइयों की समीक्षा की जाएगी।
