झोटा हत्याकांड: मुख्यमंत्री मान ने सभी मांगें स्वीकार किए जाने की बात कही, परिवार के फैसले का इंतजार
पंजाब के मानसा जिले में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने परिवार और संघर्ष समिति की सभी जायज मांगों को स्वीकार कर लिया है और अब अंतिम संस्कार का निर्णय परिवार तथा समिति पर निर्भर करता है। परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से परिवार ने मांगें पूरी होने तक अंतिम संस्कार और पोस्टमार्टम न करने का निर्णय लिया हुआ है।

परिजनों और समिति की 14 प्रमुख मांगें
परिवार और संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक (DGP) के इस्तीफे, सीबीआई जांच और हत्या के मामले में सख्त कार्रवाई समेत कुल 14 मांगें रखी हैं। इन मांगों में मानसा के संबंधित एसएचओ, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर को सेवा से बर्खास्त करना, झोटा की याद में उनके नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाना, और हमलावरों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कड़ी सजा दिलाना शामिल है। इसके अलावा, नशीले पदार्थों के रूप में दुरुपयोग की जाने वाली कुछ दवाओं को एनडीपीएस अधिनियम के दायरे में लाने और एंटी-ड्रग फोर्स के कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग भी शामिल है।
परविंदर सिंह झोटा का संघर्ष और घटनाक्रम
मानसा के बठिंडा रोड पर 13 अक्टूबर को एक मेडिकल स्टोर के मालिक ने कथित तौर पर गोली मारकर परविंदर सिंह झोटा की हत्या कर दी थी। झोटा ने आरोपी दुकानदार पर नशीली गोलियां बेचने का आरोप लगाया था, जिसके बाद दोनों के बीच बहस हुई और दुकानदार ने गोली चला दी। पूर्व फ्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी झोटा पिछले चार वर्षों से मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान चला रहे थे। उन्होंने एक एंटी-ड्रग टास्क फोर्स का गठन किया था और संदिग्ध मेडिकल स्टोरों पर स्टिंग ऑपरेशन चलाकर पुलिस को कथित ड्रग तस्करों को सौंपा था।
अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस
मुख्यमंत्री द्वारा सभी जायज मांगें माने जाने की घोषणा के बाद अब सभी की निगाहें परिवार और संघर्ष समिति के अगले कदम पर टिकी हैं। परिवार का कहना था कि जब तक उनकी सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। प्रशासन और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद अब यह देखना होगा कि परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कब शुरू करता है।
