जेवर बस अग्निकांड: नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही बनी बड़ी वजह
यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास हुए दर्दनाक बस हादसे ने देश की परिवहन प्रणाली की कई गंभीर कमियों को उजागर कर दिया है। दिल्ली से महोबा जा रही एक निजी डबल-डेकर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। इस दुर्घटना के पीछे नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक अमले की उदासीनता को मुख्य कारण माना जा रहा है।

तकनीकी खामियां और शॉर्ट सर्किट
विशेषज्ञों के अनुसार, चलती बस में अचानक आग लगने की घटना मुख्य रूप से तकनीकी विफलता और इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की ओर इशारा करती है। स्थानीय स्तर पर बस बॉडी तैयार करने वाले कई निर्माता आधुनिक मल्टीप्लेक्सिंग तकनीक का उपयोग नहीं करते हैं, जिससे एक छोटा सा शॉर्ट सर्किट भी पूरी गाड़ी को मिनटों में राख कर सकता है। इसके अलावा, वाहनों की फिटनेस जांच में होने वाली अनियमितताएं और फर्जी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी होना भी इन हादसों को खुला निमंत्रण दे रहा है।

सामूहिक विफलता और सख्त कार्रवाई की जरूरत
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की त्रासदियों के लिए केवल वाहन चालक या मालिक ही नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम जिम्मेदार है। वाहन निर्माताओं से लेकर सरकारी तंत्र तक, हर स्तर पर नियमों का पालन कराने में ढिलाई बरती जा रही है। मोटर वाहन निरीक्षकों की कमी के कारण गैर-तकनीकी कर्मचारी जांच का जिम्मा संभाल रहे हैं, जिससे तकनीकी जटिलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस गंभीर घटना के बाद विभिन्न संगठनों ने भी सरकार से लापरवाह ट्रांसपोर्टर्स पर सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
