लाइफ इंश्योरेंस की मिस-सेलिंग रोकने के लिए IRDAI का कड़ा कदम, कम होगा डिस्ट्रीब्यूटरों का कमीशन
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बैंकों और अन्य डिस्ट्रीब्यूटरों द्वारा लाइफ इंश्योरेंस उत्पादों की मिस-सेलिंग यानी गुमराह कर बिक्री करने की प्रथा पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रस्ताव पेश किए हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को वित्तीय नुकसान से बचाना और बीमा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

टार्गेट पूरा करने के दबाव में होती है मिस-सेलिंग
अक्सर देखा गया है कि बैंक कर्मचारी अपने तय टार्गेट को पूरा करने के चक्कर में ऐसे ग्राहकों को भी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच देते हैं जो अगले साल प्रीमियम भरने में सक्षम नहीं होते हैं। प्रीमियम न भर पाने की स्थिति में पॉलिसी बेकार हो जाती है और ग्राहक की पहले साल की जमा राशि भी डूब जाती है। विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां लोग बैंक खाता खुलवाने या लोन लेने जाते हैं, उन्हें बिना पूरी जानकारी दिए बीमा उत्पाद थमा दिए जाते हैं।
कमीशन घटाने का प्रस्ताव
इस तरह की अनियमिताओं पर अंकुश लगाने के लिए IRDAI ने डिस्ट्रीब्यूटरों के कमीशन को सीमित करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्तमान में लाइफ इंश्योरेंस बेचने पर डिस्ट्रीब्यूटरों को पहले साल 25 प्रतिशत से अधिक कमीशन मिलता है, जिसे घटाकर अब 10 प्रतिशत तक किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा एजेंटों के कमीशन में भी पांच प्रतिशत की कमी का प्रस्ताव रखा गया है, हालांकि इससे बीमा कंपनियों के मार्जिन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ग्राहकों की सहमति और पारदर्शिता होगी अनिवार्य
नए प्रस्तावों के अनुसार, ग्राहकों को बिना उनकी स्पष्ट अनुमति और विस्तृत जानकारी दिए कोई भी बीमा उत्पाद नहीं बेचा जा सकेगा। बीमा कंपनियां और डिस्ट्रीब्यूटर अक्सर अपने उत्पादों का पूरा वित्तीय ब्रेकअप सार्वजनिक नहीं करते हैं। इन नए प्रावधानों से बिक्री के तरीके में पारदर्शिता आएगी और ग्राहकों के लिए बीमा खरीदना अधिक सरल और सुरक्षित हो जाएगा।
