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भारत में इस बार कमजोर रह सकती है सर्दी, प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव से बदलेगा मौसम

भारत में इस बार कमजोर रह सकती है सर्दी, प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव से बदलेगा मौसम

प्रशांत महासागर में लगातार हो रही मौसमी हलचल के बीच इस बार भारत में सामान्य से कम ठंड महसूस होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम से जुड़े विभिन्न मॉडलों और आंकलनों के मुताबिक, आने वाले महीनों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है जिससे सर्दियों का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा।

भारत में इस बार कमजोर रह सकती है सर्दी, प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव से बदलेगा मौसम

दिसंबर में चरम पर होगा अल नीनो का प्रभाव

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा आकलन के अनुसार, नवंबर से जनवरी के दौरान प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है। कई जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि दिसंबर के महीने में यह अपने चरम पर पहुंच जाएगा। समुद्र की सतह के तापमान में होने वाले इन बदलावों का सीधा असर दक्षिण एशिया के बड़े हिस्से के मौसम पर पड़ता है, जिससे भारत में भी तापमान और वर्षा के स्वरूप में परिवर्तन दिखाई दे सकता है।

उत्तर भारत में ठंड के तेवर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार लंबे समय तक कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना काफी कम है, और सर्दी की शुरुआत अपेक्षाकृत गर्म रह सकती है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि बिल्कुल भी ठंड नहीं होगी। उत्तरी हिस्सों में ठंड की तीव्रता पश्चिमी विक्षोभ, पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं की सक्रियता पर निर्भर करेगी।

दिल्ली के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे मैदानी इलाकों में कुछ समय के लिए तापमान में गिरावट आ सकती है और छिटपुट शीतलहर चलने की आशंका को भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर बर्फबारी और मैदानी भागों में ठंडी हवाएं चलने की स्थिति बन सकती है, जिससे कुछ दिनों के लिए तेज ठंड महसूस हो सकती है।

मौसम की अन्य स्थितियां भी तय करेंगी मिजाज

जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो फरवरी तक अपना प्रभाव बनाए रख सकता है। हालांकि, देश के सभी हिस्सों में इसका असर एक समान नहीं होगा। हिंद महासागर की स्थिति, पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी परिस्थितियां मिलकर सर्दियों की वास्तविक तीव्रता तय करेंगी। मौसम विभाग की तरफ से आधिकारिक पूर्वानुमान आने के बाद तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।