Search for:
  • Home/
  • देश/विदेश/
  • H-1B वीजा पर जेडी वेंस की टिप्पणी से नाराज भारत, विदेश मंत्रालय ने बयानों को बताया बेबुनियाद
H-1B वीजा पर जेडी वेंस की टिप्पणी से नाराज भारत, विदेश मंत्रालय ने बयानों को बताया बेबुनियाद

H-1B वीजा पर जेडी वेंस की टिप्पणी से नाराज भारत, विदेश मंत्रालय ने बयानों को बताया बेबुनियाद

भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा H-1B वीजा और हायरिंग प्रक्रिया को लेकर दिए गए बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह निराधार बताया है। अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में इस प्रकार की चर्चाओं के बीच भारतीय पक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है और इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के बयानों में इस्तेमाल की गई भाषा और तर्क वास्तविकता से कोसों दूर हैं।

H-1B वीजा पर जेडी वेंस की टिप्पणी से नाराज भारत, विदेश मंत्रालय ने बयानों को बताया बेबुनियाद

एच-1बी वीजा को लेकर क्या कहा गया था?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिकी कंपनियों में काम कर रहे विदेशी नागरिकों को लेकर विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने विदेशी कामगारों को ‘बंधुआ मजदूर’ की संज्ञा दी थी। इसके साथ ही, उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख अमेरिकी कंपनियों पर सबसे ज्यादा विदेशी कामगारों को काम पर रखने का आरोप भी लगाया था। इस प्रकार की टिप्पणियों ने तकनीकी और कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चाओं को जन्म दिया है, जिस पर भारत ने अपनी स्पष्ट और मजबूत प्रतिक्रिया दर्ज कराई है।

भारत की तरफ से आया कड़ा जवाब

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि इस्तेमाल की गई भाषा और दावे पूरी तरह से आपत्तिजनक और बेबुनियाद हैं। मंत्रालय का मानना है कि H-1B वीजा कार्यक्रम के माध्यम से न केवल भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं, बल्कि यह अमेरिकी कंपनियों को भी अत्यधिक लाभ पहुंचाता है। भारत का यह रुख यह स्पष्ट करता है कि कुशल पेशेवर दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी विकास में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह वीजा प्रणाली अमेरिकी उद्योगों में उच्च स्तर की प्रतिभा, नवाचार (इनोवेशन), अनुसंधान (रिसर्च), उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देती है। इससे अमेरिका में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं और शेयरधारकों की संपत्ति में भी वृद्धि होती है। इस प्रकार, विदेशी कामगारों और वीजा धारकों का यह योगदान अमेरिकी कॉर्पोरेट सेक्टर को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करने में सहायक साबित होता है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।