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भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और महंगे इलाज की चुनौती

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और महंगे इलाज की चुनौती

स्वस्थ रहना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार माना गया है, लेकिन चिकित्सा और स्वास्थ्य बाजार के बढ़ते प्रभाव के कारण आम आदमी के लिए इलाज कराना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन शारीरिक, मानसिक और सामाजिक पहलुओं को स्वास्थ्य का आधार मानता है, जबकि देश में स्वास्थ्य का पैमाना मुख्य रूप से बीमारियों के इलाज तक सीमित होकर रह गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई नीतियां और नियम बनाए गए हैं, लेकिन धरातल पर उनकी स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और महंगे इलाज की चुनौती

बजटीय आवंटन और स्वास्थ्य योजनाओं का दायरा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं पर जीडीपी का ढाई प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जाना चाहिए। हालांकि, इसके मुकाबले कम बजटीय आवंटन होने के कारण एक सीमित आबादी को ही सरकारी बीमा और योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के दायरे से बाहर हैं। सही और समय पर इलाज न मिलने या फिर अत्यधिक महंगे उपचार के कारण करोड़ों परिवारों का कर्ज के दलदल में फंस जाना एक गंभीर समस्या बन चुका है।

सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा और निजी क्षेत्र का प्रभाव

राजधानी से लेकर विभिन्न राज्यों के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखने को मिलती है। कई बड़े सरकारी अस्पतालों में गंभीर जांच और ऑपरेशनों के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची होती है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी चिकित्सा संस्थानों में इलाज का खर्च कई गुना अधिक होता है। अदालतों के पुराने फैसलों के बावजूद आम जनता को किफायती और सुलभ चिकित्सा मुहैया कराने की जिम्मेदारी पर अमल को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और महंगे इलाज की चुनौती

चिकित्सा नियमन और दवाओं के बढ़े दाम

अस्पतालों के नियमन और दरों के निर्धारण को लेकर लंबे समय से चर्चा और निर्देश जारी होते रहे हैं, लेकिन धरातल पर कड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। रियायती दरों पर इलाज उपलब्ध कराने की शर्तें पूरी न होने और जीवन रक्षक दवाओं के अत्यधिक ऊंचे दामों के कारण मरीजों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पोर्टलों और डिजिटल माध्यमों से आंकड़े एकत्र करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन फार्मेसी और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता बनी हुई है।