दोपहर की छोटी झपकी सेहत के लिए फायदेमंद, लेकिन अत्यधिक नींद हो सकती है चिंता का विषय
दिन के समय कुछ देर की नींद लेना या झपकी लेना मानसिक सतर्कता और मूड को बेहतर बनाने में मददगार साबित होता है। इसे शरीर के लिए एक प्राकृतिक बूस्टर माना जाता है, जो तरोताजा महसूस कराने का काम करता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इसकी समय सीमा और जरूरत को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि हर किसी के लिए इसके परिणाम एक जैसे नहीं होते।

स्मरण शक्ति और सतर्कता के लिए लाभदायक
हाल ही में हुए कुछ वैज्ञानिक शोधों से यह सामने आया है कि यदि किसी कारणवश रात में पूरी नींद न हो पाए, तो दिन में ली जाने वाली करीब नब्बे मिनट की झपकी याददाश्त और कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। यह प्रक्रिया मस्तिष्क को नई जानकारी आसानी से ग्रहण करने के अनुकूल बनाती है। छात्रों और रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोगों के लिए यह तरीका काफी असरदार माना गया है। इसके अलावा, केवल बीस मिनट आंखें बंद कर आराम करना भी शरीर की ऊर्जा और चौकन्नापन को तुरंत बढ़ा सकता है।
किसे मिलता है सबसे ज्यादा लाभ?
नाइट शिफ्ट करने वाले कर्मचारियों, छोटे बच्चों के अभिभावकों और लगातार अलग-अलग समय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले यात्रियों को दिन की झपकी से काफी राहत मिलती है। मुंबई की लोकल ट्रेनों में सफर करने वाले आम यात्रियों का उदाहरण देते हुए यह समझा जा सकता है कि कैसे लोग कम समय में भी अपनी थकान मिटा लेते हैं। हालांकि, ये झपकियां आमतौर पर प्राकृतिक रूप से आती हैं और इनका समय बहुत मायने रखता है।

कब बन सकती है यह स्वास्थ्य समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति को दिन में सोने की सलाह नहीं दी जाती है। जिन लोगों को रात में ठीक से नींद न आने की पुरानी समस्या यानी क्रॉनिक इन्सोम्निया है, उनके लिए दिन में सोना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। यदि कोई व्यक्ति बिना किसी कारण के दिनभर अत्यधिक उनींदापन या सुस्ती महसूस करता है, तो यह किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सीय सलाह लेना आवश्यक हो जाता है ताकि किसी भी बड़ी परेशानी से बचा जा सके।
