Search for:
  • Home/
  • उत्तराखंड/
  • उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, कला और परंपराओं का उत्सव है ‘हिमालय निनाद’ : कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।

उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, कला और परंपराओं का उत्सव है ‘हिमालय निनाद’ : कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन संस्कृति केंद्र सभागार में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित हिमालय निनाद उत्सव-2025 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचे कलाकारों का सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध उस्ताद पंडित रजनीश मिश्रा -रितेश मिश्रा ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी, जिनके मधुर सुरों और भावपूर्ण गायन ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी को राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नौ दिवसीय कार्यक्रम उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और साहित्य की समृद्ध परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव प्रदेश की विविध सांस्कृतिक धरोहर को एक मंच पर लाकर राज्य की पहचान और अस्मिता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है।

 

मंत्री जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति में लोकगीत, नृत्य और वाद्य परंपराएँ हमारी आत्मा से जुड़ी हैं। ऐसे आयोजनों से जहां स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है, वहीं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थापना के 25 वर्षों की यह यात्रा विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भी यात्रा है। उत्तराखण्ड की संस्कृति, लोक धरोहर और पारंपरिक कलाएं हमारी पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष राजीव गुरुंग, सचिव संस्कृति विभाग युगल किशोर पंत सहित कई लोग उपस्थित रहे।

22 Comments

  1. I do enjoy the way you have framed this particular concern plus it really does offer us a lot of fodder for thought. Nonetheless, because of what I have seen, I simply wish when the feed-back pack on that folks continue to be on point and don’t embark on a soap box regarding the news du jour. Anyway, thank you for this exceptional piece and though I do not necessarily agree with it in totality, I regard the viewpoint.

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required