मतदाता सूची से नाम हटाने के बड़े पैमाने पर आवेदनों पर निर्वाचन आयोग ने लगाई रोक
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए आने वाले आवेदनों पर नई सीमाएं तय कर दी हैं। यह कदम सूची से नाम कटवाने के लिए थोक में आवेदन मिलने की शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिससे मतदाताओं को होने वाली असुविधा और अधिकारियों के काम का बोझ कम किया जा सके।

फॉर्म जमा करने की नई सीमाएं
निर्वाचन आयोग के नए निर्देशों के अनुसार, दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान कोई भी व्यक्तिगत मतदाता पूरी अवधि में अधिकतम 10 फॉर्म 7 आवेदन ही जमा कर सकेगा। वहीं, मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन (continuous updating) के दौरान यह सीमा प्रति माह पांच आवेदन तय की गई है। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया
संशोधित प्रणाली के तहत, चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) सबसे पहले आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी करेंगे। इसके बाद व्यक्तिगत रूप से उसकी बात सुनी जाएगी और प्रत्येक फॉर्म के लिए बयानों को अलग से दर्ज किया जाएगा। अधिकारी द्वारा आपत्तियों की वैधता से संतुष्ट होने के बाद ही नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसमें आपत्ति वाले व्यक्ति को भी सुनवाई का अवसर मिलेगा।
उद्देश्य और निर्देश
आयोग का यह निर्देश मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए मनगढ़ंत या अत्यधिक आपत्तियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन नए दिशा-निर्देशों को मैदानी स्तर के अधिकारियों तक पहुंचाएं और इसका उचित प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें।
