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दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीडीए पार्क में रामलीला के आयोजन पर लगाई रोक, हरियाली बचाने पर जोर

दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीडीए पार्क में रामलीला के आयोजन पर लगाई रोक, हरियाली बचाने पर जोर

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसले में डीडीए पार्क में रामलीला के आयोजन पर रोक लगा दी है। अदालत की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थल पर हरियाली को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीडीए पार्क में रामलीला के आयोजन पर लगाई रोक, हरियाली बचाने पर जोर

अदालत ने खारिज की रामलीला कमेटी की याचिका

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्बरे की अगुवाई वाली खंडपीठ ने श्री सनातन धर्म रामलिला कमेटी की अपील को खारिज कर दिया। कमेटी ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें नारायणा के चिंटू पार्क में रामलीला आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार किया गया था और उस भूमि को हरित क्षेत्र के रूप में संरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था।

कमेटी और डीडीए का पक्ष

सुनवाई के दौरान रामलीला कमेटी ने दलील दी कि वे पिछले 53 वर्षों से इस स्थान पर रामलीला का आयोजन कर रहे हैं। कमेटी ने यह भी कहा कि वे इस बात का लिखित आश्वासन देने को तैयार हैं कि आयोजन समाप्त होने के बाद जमीन को उसकी मूल स्थिति में वापस ला दिया जाएगा और प्रभावित होने वाले पौधों की भरपाई की जाएगी।

दूसरी ओर, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। डीडीए ने अदालत को बताया कि अदालती निर्देशों के बाद इस पार्क के सौंदर्यीकरण और विकास पर भारी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च किया गया है। प्राधिकरण का तर्क था कि इस प्रकार के आयोजनों से हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंच सकता है और किसी भी संगठन का किसी विशेष भूमि पर स्थायी रूप से अधिकार नहीं हो सकता है।

न्यायालय का निर्णय

मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्थल से जुड़ी तस्वीरों का अवलोकन किया। अदालत ने माना कि पार्क के विकास में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन का निवेश किया गया है। एकल पीठ के फैसले में किसी भी प्रकार की त्रुटि या बदलाव के लिए पर्याप्त आधार न मिलने के कारण खंडपीठ ने रामलीला कमेटी की याचिका को नामंजूर कर दिया।