Search for:
  • Home/
  • कानून/
  • ओबीसी क्रीमीलेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रहा केंद्र, सेवा आवंटन पर फंसा पेंच
ओबीसी क्रीमीलेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रहा केंद्र, सेवा आवंटन पर फंसा पेंच

ओबीसी क्रीमीलेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रहा केंद्र, सेवा आवंटन पर फंसा पेंच

केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद पैदा हुई व्यावहारिक कठिनाइयों पर शीर्ष अदालत के निर्देशों का इंतजार कर रही है, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए क्रीमीलेयर की स्थिति तय करने के मानदंडों पर बात की गई थी। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा CSE-2025 के लिए अनुशंसित 958 उम्मीदवारों को सेवा आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अदालत से स्पष्टीकरण मांगा है।

ओबीसी क्रीमीलेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रहा केंद्र, सेवा आवंटन पर फंसा पेंच

शीर्ष अदालत का फैसला और DoPT का रुख

यह मामला यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है। अदालत ने अपने फैसले में माना था कि ओबीसी आरक्षण के लिए ‘क्रीमीलेयर’ का दर्जा केवल माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता है। साथ ही, निजी संस्थाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों से अलग मानना भेदभावपूर्ण हो सकता है। DoPT ने इस फैसले के व्यापक प्रभावों का अध्ययन करने के बाद अगस्त में शीर्ष अदालत में एक विविध आवेदन दायर किया था, जिसमें फैसले के कार्यान्वयन पर स्पष्ट निर्देश मांगे गए थे।

प्रशिक्षण और वरिष्ठता पर प्रभाव

सूत्रों के अनुसार, विभाग और सभी प्रशिक्षण संस्थान सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के उम्मीदवारों को सेवा आवंटित करने और फाउंडेशन कोर्स शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अधिकारियों का कहना है कि पाठ्यक्रम शुरू होने में होने वाली देरी से उम्मीदवारों की वरिष्ठता, ग्रेडेशन या अन्य सेवा शर्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, सेवा आवंटन एक बार हो जाने के बाद उसे बदलना मुश्किल होता है, इसलिए सरकार कोई भी कदम उठाने से पहले अदालत के रुख को स्पष्ट करना चाहती है।

अन्य भर्तियों और नीतियों पर संभावित असर

  • फैसले के क्रियान्वयन से देश भर की अन्य सरकारी भर्तियों और ओबीसी आरक्षण नीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
  • पूर्व की भर्तियों, रेलवे, बैंकिंग और एसएससी जैसी संस्थाओं द्वारा की गई नियुक्तियों में भी इसके परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
  • कर्मचारियों की मौजूदा वरिष्ठता और ग्रेडेशन पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।

केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों के साथ इस मामले पर विस्तृत विचार-विमर्श किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता या अनुपालन से जुड़ी समस्या उत्पन्न न हो।