बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता इमरान खान की ‘लीव इंडिया’ नोटिस के खिलाफ याचिका पर सुनवाई 2 नवंबर तक टाली
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता इमरान खान द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई आगामी 2 नवंबर तक टाल दी है, जिसमें उन्हें भारत छोड़ने के निर्देश देने वाले नोटिस को चुनौती दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को मौखिक आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही इस मामले पर अदालत का रुख साफ होने तक चुनौती को फिलहाल स्थगित रखा गया है।

याचिका में क्या उठाए गए हैं मुद्दे?
इमरान खान ने मुंबई स्थित फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (FRRO) द्वारा 14 अक्टूबर को जारी किए गए ‘लीव इंडिया नोटिस’ (LIN) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की थी। इस नोटिस के तहत उन्हें 28 अक्टूबर या उससे पहले देश छोड़ने का आदेश दिया गया था। अभिनेता की याचिका में तर्क दिया गया है कि यह नोटिस बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए और बिना कोई सुनवाई का मौका दिए जारी किया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके पास वर्ष 2006 से ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) का दर्जा प्राप्त है और वह दो वर्ष की आयु से ही भारत में रह रहे हैं।
मुंबई पुलिस की हिरासत और विरोध प्रदर्शन का मामला
याचिका के अनुसार, इस पूरे विवाद का संबंध 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान और नाना चौक के पास हुई एक घटना से है, जहां अभिनेता को पुलिस ने कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। इमरान खान के प्रतिनिधियों का कहना है कि वह न तो किसी विरोध प्रदर्शन के आयोजक थे और न ही उसमें शामिल हुए थे, बल्कि वह केवल यह देखने गए थे कि वहां क्या हो रहा था। मौके पर पहुंचने से पहले ही मीडिया कर्मियों की भीड़ और पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था।
कानूनी सुरक्षा और ओसीआई कार्ड का दर्जा
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि खान अपनी शिक्षा, पेशेवर काम और पारिवारिक संबंधों के कारण लंबे समय से भारत से जुड़े हुए हैं। उन्होंने नोटिस को आनुपातिक रूप से गलत और कानूनी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन बताया है। अदालत के समक्ष दायर इस याचिका में नोटिस को रद्द करने और एफआरआरओ द्वारा उपयोग किए गए दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है, साथ ही मामले के लंबित रहने के दौरान ओसीआई पंजीकरण या देश से निकाले जाने की कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया गया है।
