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चंदौली में खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट के लिए करना पड़ता है लंबा इंतजार

चंदौली में खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट के लिए करना पड़ता है लंबा इंतजार

चंदौली जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार नमूने एकत्र किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच प्रयोगशाला की सुविधा न होने के कारण रिपोर्ट आने में काफी विलम्ब होता है। अधिकारियों को खाद्य सैंपल जांच के लिए बाहर भेजने पड़ते हैं, जिससे अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने में लगभग एक महीने का समय लग जाता है। इस देरी के कारण मामलों में त्वरित कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

चंदौली में खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट के लिए करना पड़ता है लंबा इंतजार

प्रयोगशाला न होने से बढ़ती है परेशानी

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमल निवास त्रिपाठी के अनुसार, जिले में जांच प्रयोगशाला न होने के कारण नमूनों को लखनऊ भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में 25 दिन से लेकर एक महीने तक का समय लग जाता है। विभाग द्वारा लिए गए नमूनों में कई बार मानक के विपरीत सामग्री और अखाद्य वस्तुएं पाई जाती हैं, जिन पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है। वर्ष 2024 से सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, हजारों निरीक्षण किए गए जिनमें बड़ी संख्या में नमूने अधोमानक और असुरक्षित पाए गए। ऐसे मामलों में अदालतों में वाद दायर कर जुर्माना भी वसूला गया है।

मिठाई की तौल में गड़बड़ी पर सख्ती

खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ बाट-माप विभाग भी तौल में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अभियान चला रहा है। कई मिठाई विक्रेता तौल के दौरान डिब्बे का वजन भी मिठाई के साथ जोड़ देते हैं, जिससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बाट-माप विभाग के जिला प्रभारी एमपी दुबे ने बताया कि अप्रैल से अक्टूबर के दौरान कई निरीक्षण किए गए और नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर समन शुल्क लगाया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले किसी भी विक्रेता को बख्शा नहीं जाएगा और तौल में गड़बड़ी मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।