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सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंटरनेट एक्सेस को मौलिक अधिकार बताना नागरिकों के लिए कितना अहम

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंटरनेट एक्सेस को मौलिक अधिकार बताना नागरिकों के लिए कितना अहम

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट तक पहुंच को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है, जिससे नागरिकों को डिजिटल स्वतंत्रता और जवाबदेही के मोर्चे पर बड़ा संबल मिला है। यह फैसला बाल सुरक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने बाल सुरक्षा के मामलों पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों को ऑनलाइन दुनिया से दूर करने के बजाय डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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डिजिटल स्वतंत्रता और नए कानूनी अधिकार

अदालत के इस महत्वपूर्ण कदम से नागरिकों को अपनी डिजिटल गतिविधियों और अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत संवैधानिक आधार मिल गया है। अब सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देकर बार-बार इंटरनेट सेवाएं बाधित करने वाले सरकारी कदमों को अदालत में अधिक मजबूती के साथ चुनौती दी जा सकती है। इससे पहले साल 2020 में भी न्यायालय ने इंटरनेट के जरिए अभिव्यक्ति और कारोबार की स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण दिया था, लेकिन इस बार इंटरनेट तक पहुंच को सीधे तौर पर मौलिक अधिकार मान लिया गया है।

सरकार की बढ़ती जिम्मेदारियां और बुनियादी ढांचा

किसी भी अधिकार को कानूनी मान्यता मिलने का मतलब केवल सरकारी पाबंदियों पर रोक लगाना नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और संसाधन मांगने का अधिकार भी देता है। जिस तरह सूचना के अधिकार और शिक्षा के अधिकार के मामलों में अदालती फैसलों के बाद कानूनों और संस्थाओं का निर्माण हुआ, उसी प्रकार इंटरनेट के क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है। अदालतों के पास अपने आदेशों को जमीन पर उतारने के लिए वित्तीय संसाधन या प्रशासनिक तंत्र नहीं होता, इसलिए इन सुविधाओं को सुनिश्चित करने की मुख्य जिम्मेदारी सरकारों पर ही आती है।

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अधिकारों को सार्थक बनाने की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट को हर नागरिक तक सुलभ और सुरक्षित बनाना समकालीन समय की बड़ी मांग है। जब तक हर व्यक्ति तक डिजिटल माध्यमों की पहुंच आसान नहीं होगी और सरकारें इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार नहीं करेंगी, तब तक इस अधिकार का पूरा लाभ धरातल पर नहीं उतर सकेगा। ऐसे में यह फैसला न केवल नागरिकों के अधिकारों को विस्तार देता है, बल्कि प्रशासन को भी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने के लिए प्रेरित करता है।