मुंबई के जलाशयों में 95% पानी होने के बावजूद अगले साल आ सकता है जल संकट
मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के लौटने के बाद हालांकि जलाशयों में पर्याप्त पानी है, लेकिन बढ़ते तापमान और वाष्पीकरण के कारण भविष्य में जल संकट की आशंका पैदा हो रही है। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेते हुए पानी के उचित प्रबंधन और बर्बादी को रोकने पर जोर दिया है।

जलाशयों की वर्तमान स्थिति
मुंबई को पीने का पानी सप्लाई करने वाले प्रमुख बांधों में अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, तुलसी और भातसा शामिल हैं। इन सभी जलाशयों की कुल जल भंडारण क्षमता इस समय लगभग 95 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके बावजूद, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस पानी को पूरे एक साल तक सुचारू रूप से चलाने की है, क्योंकि भीषण गर्मी और तापमान में वृद्धि के कारण पानी के वाष्पीकरण की दर काफी अधिक है।
पानी की बर्बादी और रिसाव की समस्या
शहर में पानी की कमी से निपटने के लिए पहले से ही 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू की गई है, जो आगे भी जारी रह सकती है। इसके साथ ही, पाइपलाइनों में रिसाव, अवैध कनेक्शन और पानी की चोरी जैसी समस्याओं के कारण बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा बिना हिसाब के नष्ट हो जाता है, जिसे रोकने के लिए नगर निकाय ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
बढ़ती मांग और भविष्य की योजना
मुंबई की विशाल आबादी और लगातार जारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण पानी की दैनिक मांग काफी अधिक है। निर्माण कार्यों और अन्य गैर-पेय जल आवश्यकताओं के लिए भी भारी मात्रा में पानी की खपत होती है। विशेषज्ञों और पार्षदों का मानना है कि वर्तमान जल भंडार को सुरक्षित रखने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी से ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है, ताकि आने वाले महीनों में किसी गंभीर संकट का सामना न करना पड़े।
