मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, बीजेपी ने सराहा लोकतंत्र
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किए जाने के बाद देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस कानूनी प्रक्रिया का स्वागत करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और स्वतंत्र संस्थाओं के सुचारू कामकाज का बड़ा उदाहरण करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट का नोटिस और मामला
शीर्ष अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव पैनल की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया है। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि आयोग के कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति या मंजूरी के बिना लिए गए थे। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस चरण पर किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मीडिया में आई खबरों के आधार पर किसी तरह का judicial order जारी नहीं किया जा सकता, क्योंकि खबरें सही भी हो सकती हैं और गलत भी। इसके साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में यह साबित होता है कि चुनाव आयोग के कोई निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अकेले लिए गए थे, तो अदालत उन फैसलों पर पुनर्विचार कर सकती है या उन्हें वापस ले सकती है।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि अदालत का यह कदम साबित करता है कि देश की सभी संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में तानाशाही या डर का कोई माहौल नहीं है, बल्कि हर नागरिक को अपनी बात खुलकर रखने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी निर्धारित प्रणालियों का पालन किया जा रहा है और देश एक मजबूत लोकतांत्रिक रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
