यूपीआई एमडीआर शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें दो हजार रुपये से अधिक के कुछ खास यूपीआई ‘पर्सन-टू-मर्चेंट’ लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है। यह मामला पिछले कई वर्षों से पूरी तरह से निशुल्क चल रहे यूपीआई भुगतानों के भविष्य से संबंधित है।

नियम और शुल्क का ढांचा
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए इस नए प्रावधान के तहत, यूपीआई के माध्यम से मर्चेंट को दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है। हालांकि, पचहत्तर हजार रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इसे अधिकतम तीन सौ रुपये तक सीमित किया गया है। इसके साथ ही, आम लोगों के बीच होने वाले ‘पर्सन-टू-पर्सन’ (पी2पी) लेन-देन को पूरी तरह से सुरक्षित और निशुल्क रखा गया है।
पीठ और जनहित याचिका
इस जनहित याचिका पर देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रंजन दत्ता ने यह मामला दायर किया है, जिसमें चौदह सितंबर की अधिसूचना और पंद्रह सितंबर के एमडीआर ढांचे को चुनौती दी गई है।
कानूनी और वैधानिक सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह शुल्क बिना किसी पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता या सार्वजनिक परामर्श के जल्दबाजी में लागू किया गया है। इसमें ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने चिंता जताई है कि केवल प्रेस विज्ञप्ति या अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) के आधार पर इस तरह का शुल्क थोपना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इसके अलावा, यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के बीच किए गए अंतर पर भी सवाल खड़े किए गए हैं, क्योंकि रुपे कार्ड पर बिना किसी सीमा के मुफ्त सुविधा जारी रखी गई है।
