मालदा में दुर्गा पूजा की तैयारियां: मूर्तिकारों के सामने बिक्री और कम बजट की बड़ी चुनौती
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में दुर्गा पूजा के अवसर पर मिट्टी की मूर्तियां तैयार करने वाले कारीगर इन दिनों भारी अनिश्चितता और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। इस मुख्य कमाई वाले सीजन में ऑर्डर मिलने के बजाय खरीदारों की ओर से मोलभाव और देरी ने स्थानीय मूर्तिकारों की चिंता बढ़ा दी है।

खरीदारों की कमी और कम बजट
मालदा के ग्रामीण इलाकों में कई मूर्तिकारों ने बताया कि पूजा समितियां अपने बजट को लेकर असमंजस में हैं, जिसके कारण वे खरीदारी में देरी कर रही हैं। कई कारीगरों ने इस सुस्ती का कारण राज्य सरकार के पूजा अनुदानों को लेकर फैली अनिश्चितता को बताया है। जिन कलाकारों ने बिक्री के लिए मूर्तियां तैयार की हैं, उनके लिए यह इंतजार काफी महंगा साबित हो रहा है, क्योंकि कच्चा माल, सामग्री और मजदूरी पर पहले ही पैसा खर्च हो चुका है।
कम कीमतों पर बेचने का दबाव
मूर्तिकारों का कहना है कि पिछले साल जो मूर्तियां अच्छे दामों पर बिकी थीं, इस बार उनके बहुत कम दाम मिल रहे हैं। कई खरीदारों ने अपने बजट में कटौती कर ली है और वे सस्ते विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। दूसरी ओर, कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण कारीगरों के लिए कम कीमत पर मूर्तियां बेचना बेहद मुश्किल हो गया है।

पारंपरिक आजीविका पर संकट
पीढ़ियों से इस पारंपरिक कार्य से जुड़े कई कारीगरों का कहना है कि उन्हें इस पेशे के अलावा और कोई काम नहीं आता। पंडालों और रोशनी पर खुलकर खर्च करने वाली कई समितियां मूर्तिकारों से लागत से भी कम कीमत पर काम करने की उम्मीद करती हैं। कारीगरों का यह भी कहना है कि उन्हें इस मुश्किल दौर में किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल रही है, जिससे उनका पूरा परिवार आर्थिक संकट में घिर गया है।
