Search for:
  • Home/
  • दक्षिण/
  • चेन्नई में नए सचिवालय निर्माण के प्रस्ताव पर एमके स्टालिन का कड़ा विरोध
चेन्नई में नए सचिवालय निर्माण के प्रस्ताव पर एमके स्टालिन का कड़ा विरोध

चेन्नई में नए सचिवालय निर्माण के प्रस्ताव पर एमके स्टालिन का कड़ा विरोध

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई में मरीना बीच के निकट फोरशोर एस्टेट इलाके में एक नए सचिवालय और विधानसभा परिसर के निर्माण की योजना का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के निर्माण की कोई आवश्यकता नहीं है, खासकर तब जब इससे एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय मछुआरों की आजीविका और उनके रिहायशी इलाके पर बुरा प्रभाव पड़े।

चेन्नई में नए सचिवालय निर्माण के प्रस्ताव पर एमके स्टालिन का कड़ा विरोध

मछुआरों के विरोध प्रदर्शन को पूरा समर्थन

अपने आधिकारिक बयान में, पूर्व मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासनिक सचिवालय जैसी इमारतें मुख्यमंत्री के कार्य करने के लिए बनाई जाती हैं, न कि वहां बैठकर समुद्र के नजारे का आनंद लेने के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस परियोजना के विरोध में सड़कों पर उतरने वाले स्थानीय मछुआरों के साथ पूरी ताकत से खड़ी है और उनके आंदोलन को हरसंभव समर्थन प्रदान करेगी।

स्टालिन ने अपने बयान में सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सहयोगी दलों और अन्य राजनीतिक संगठनों द्वारा आपत्तियां जताए जाने के बावजूद, इस नए सचिवालय भवन के निर्माण से संबंधित सरकारी आदेश को वापस नहीं लिया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस तरह के अड़ियल रविष्णुता और अहंकार को उनकी पार्टी द्वारा पूरी तरह से चुनौती दी जाएगी और दबाया जाएगा।

पर्यावरण और स्थानीय बस्तियों की चिंता

इस विवादास्पद परियोजना को लेकर केवल डीएमके ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी मुखर हैं। माकपा (CPI-M), जो बाहर से सरकार का समर्थन कर रही है, ने भी इस क्षेत्र में सचिवालय के निर्माण का पुरजोर विरोध किया है। पार्टी का मानना है कि यह इलाका पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है और यहां इस तरह का विशाल निर्माण कार्य करने से गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिसका सीधा असर वहां की स्थानीय आबादी और पर्यावरण संतुलन पर पड़ेगा।

  • फोरशोर एस्टेट और मरीना बीच के पास प्रस्तावित है नया सचिवालय परिसर
  • मछुआरों की आजीविका और बस्तियों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंता
  • पर्यावरण की संवेदनशीलता के कारण विभिन्न दलों द्वारा लगातार विरोध
  • स्थानीय मछुआरों के आंदोलन को विपक्षी दलों और संगठनों का पूरा समर्थन