सांप्रदायिकता पर हामिद अंसारी की टिप्पणी से राजनीतिक गलियारों में गरमाई सियासत
देश के पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के एक हालिया संबोधन के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बड़ी बहस छिड़ गई है। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर दिए गए अपने भाषण के दौरान हिंदू दक्षिणपंथ को देश के लिए बड़ा खतरा बताया, जिसके बाद से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उनके इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों, संगठनों और धर्मगुरुओं की तरफ से विरोध और असहमति जताई गई है।

व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान दिया गया वक्तव्य
नई दिल्ली में आयोजित एक स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति ने एजी नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक ‘द आरएसएस : ए मीनेस टू इंडिया’ की प्रस्तावना का हवाला दिया। अंसारी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उस पुरानी टिप्पणी को दोहराया, जिसमें उन्होंने भारत के लिए साम्यवाद के बजाय हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को बड़ा खतरा बताया था। इसके साथ ही, उन्होंने नागरिक राष्ट्रवाद के स्थान पर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उभार पर भी अपनी चिंता जाहिर की और कहा कि ऐसी प्रवृत्तियां चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत के रूप में पेश कर सकती हैं तथा नागरिकों को धर्म के आधार पर विभाजित कर सकती हैं।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की कड़ी आपत्ति
पूर्व उपराष्ट्रपति के इस बयान के सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। विहिप के प्रवक्ता ने कहा कि अंसारी को बहुसंख्यक हिंदू समाज के बारे में ऐसी टिप्पणी करने से पहले अपने पूर्व संवैधानिक पद और देश की सामाजिक विविधता का अवश्य ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि देश में हिंदुओं का सांस्कृतिक पुनरुत्थान और उभार कुछ लोगों को चरमपंथ नजर आता है, जो पूरी तरह से अनुचित है। आलोचकों का यह भी मानना है कि इस प्रकार के बयानों से देश की सामाजिक समरसता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और राजनीतिक माहौल अधिक गर्म हो सकता है।
प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद के बीच देश के कुछ प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने भी इस बयान से अपनी दूरी बनाई है और अपनी असहमति प्रकट की है। अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से समाज में अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है और इस मामलों में भाषा का इस्तेमाल करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रमुख ने भी विचार व्यक्त किया कि भारत में किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत पैदा करने वाली भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए ताकि आपसी सौहार्द और भाईचारा हमेशा कायम रह सके।
