भारत-नेपाल सीमा पर किराए की कोख और मानव तस्करी का कथित अवैध कारोबार
भारत और नेपाल की सीमा से लगे क्षेत्रों में मानव तस्करी और किराए की कोख से जुड़ा एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। आरोप है कि संतान प्राप्ति और कथित तौर पर सुंदर बच्चे की मांग को आधार बनाकर दलालों द्वारा एक अवैध नेटवर्क चलाया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से कमजोर नेपाली युवतियों को निशाना बनाए जाने के दावे किए जा रहे हैं।

दलालों द्वारा करोड़ों के लेन-देन का दावा
सामने आई जानकारियों के अनुसार, इस कथित नेटवर्क के जरिए दलाल निःसंतान दंपत्तियों से भारी रकम वसूलते हैं। कुछ मामलों में यह राशि करीब एक करोड़ रुपये तक होने की बात कही गई है, जबकि गर्भधारण करने वाली युवती को मामूली राशि दिए जाने का आरोप है। हालांकि, इन दावों और आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
युवतियों को लंबे समय तक रोकने और शोषण के आरोप
कथित तौर पर दलाल इन युवतियों को भारत लाकर लंबे समय तक अपने नियंत्रण में रखते हैं। आरोप यह भी है कि प्राकृतिक गर्भधारण के लिए उन्हें संबंधित पुरुषों के साथ संबंध बनाने के लिए बाध्य किया जाता है। प्रसव के तुरंत बाद नवजात शिशु को इच्छुक दंपत्ति को सौंप दिया जाता है और युवती को वापस नेपाल भेज दिया जाता है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मानवाधिकारों और महिला गरिमा का गंभीर उल्लंघन होगा।

कानूनी पहलू और जांच की आवश्यकता
भारतीय कानूनों के तहत व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है और इसके लिए कड़े नियम निर्धारित हैं। ऐसे में यदि किसी महिला को दबाव या धोखे से गर्भधारण के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो यह कानूनन अपराध है। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों की तह तक जाने के लिए पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच समन्वित जांच की बेहद आवश्यकता है ताकि इस प्रकार के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।
