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कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी ने राज्य स्थापना के रजत जयंती के उपलक्ष में की प्रेसवार्ता,मशरूम उत्पादन में उत्तराखण्ड, देश में पांचवे स्थान पर,पांचवें धाम सैन्य धाम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में।

प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण, सैनिक कल्याण एवं ग्राम्य विकास मंत्री श्री गणेश जोशी ने आज सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार, नई टिहरी में राज्य स्थापना के रजत जयंती के उपलक्ष में प्रेस से वार्ता की। कैबिनेट मंत्री ने राज्य स्थापना की बधाई देते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए सैनिक कल्याण, कृषक कल्याण एवं ग्राम्य विकास की राज्य स्थापना से लेकर अब तक के विकास कार्यों की जानकारी दी।

 

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सैनिक कल्याण हमारी प्रथम प्राथमिकता है और यह संख्याएँ केवल आँकड़े नहीं, बल्कि हमारी प्रतिबद्धता की कहानी हैं। वर्ष 2000 में जब राज्य अस्तित्व में आया, तब विभाग का बजट मात्र चार करोड छब्बीस लाख रुपये था, जो आज बढ़कर अस्सी करोड़ पचास लाख रुपये हो गया है। इसी प्रकार, वर्ष 2000 में जहाँ एक लाख छत्तीस हजार पूर्व सैनिक और आश्रित पंजीकृत थे, वहीं आज उनकी संख्या बढ़कर एक लाख बयानवे हजार हो चुकी है। सैनिक विश्राम गृहों की संख्या जो राज्य गठन के समय मात्र 18 थी, आज बढ़कर 36 हो गई है। इसमें 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कहा कि यह हमारे शहीदों और उनके परिवारों के प्रति हमारे दायित्व एवं सैनिकों के सम्मान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए, हमने पेंशन और अनुदानों में ऐतिहासिक वृद्धि की है। कारगिल शहीदों को देय पेंशन जो कि राज्य गठन पर माता-पिता को 2500 रुपये व पत्नी को 5000 रुपये मिलती थी, वर्तमान में यह राशि बढाकर माता पिता को 5000 रुपये तथा पत्नी को 7500 रुपये दी जा रही है। परमवीर चक्र विजेताओं के लिए एकमुश्त अनुदान राशि जो कि वर्ष 2000 में दो लाख रुपये थी, को बढ़ाकर एक करोड़ पचास लाख रुपये कर दिया गया है। वर्ष 2014 से शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जा रही एकमुश्त अनुदान राशि को 10 लाख रुपये से बढाकर अब 50 लाख रुपये तक कर दिया गया है।

 

उन्होंने कहा कि सैनिक कल्याण विभाग ने समय के साथ कई नवीन एवं प्रेरक योजनाएँ भी पूर्व सैनिकों एवं शहीद सैनिकों के आश्रितों हेतु प्रारंभ की हैं। वर्ष 2007 में प्रत्येक ब्लॉक में पूर्व सैनिक ब्लॉक प्रतिनिधि नियुक्त किए गए, जिससे विभाग और सैनिक समाज के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ तथा पूर्व सैनिकों, सैनिक विधवाओं व उनके आश्रितों को उनके कल्याण संबंधी योजनाओं के संबंध में जानकारी व अधिकतम कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हुआ। वर्तमान में राज्य के समस्त विकास खण्डों में ब्लॉक प्रतिनिधि नियुक्त हैं। वर्ष 2018 में सरकार द्वारा शहीद सैनिकों के परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी का प्राविधान किया गया। हमारे राज्य में सबसे बडे पांचवें धाम सैन्य धाम का निर्माण वर्ष 2021 में प्रारंभ हुआ और अब यह अपने अंतिम चरण में है। यह धाम हमारे हर उन शहीदों की स्मृति को सदैव अमर रखेगा, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित किया।

 

वर्ष 2023 से अब तक 10 शहीद द्वार और स्मारक निर्मित किए जा चुके हैं, ताकि हमारी नई पीढ़ी शहीद वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान को न भूले। विभाग को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की ओर प्रयास किया जा रहा है। प्रत्येक जिले में एक एकीकृत सैनिक कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की योजना है, जहाँ सैनिक कल्याण कार्यालय, ईसीएचएस, सीएसडी कैंटीन और सैनिक विश्राम गृह सब एक ही परिसर में उपलब्ध होंगे। राज्य सरकार सैनिकों एवं उनके परिवारों के कौशल विकास और रोजगार पर भी विशेष ध्यान दे रही है।

 

मा. मंत्री जी ने कहा कि सशक्त किसान, सशक्त उत्तराखंड, यह हमारा मूल मंत्र है। पिछले पच्चीस वर्षों में हमने न केवल हमारे अन्नदाता किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उद्यान विभाग का वर्ष 2001 का बजट मात्र दो करोड़ पचहत्तर लाख रुपये था, जिसमें सतत् वृद्धि करते हुए वर्ष 2025 में सात सौ चवालीस करोड़ पच्चीस लाख कर दिया गया है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर ने पिछले 25 वर्षों में सत्ताईस हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षित किया और अनुसंधान के क्षेत्र में अब तक 141 नई फसल प्रजातियां विकसित की गईं। देश के 71 कृषि विश्वविद्यालयों में यह पहला विश्वविद्यालय था जिसे क्यू एस वर्ल्ड रैंकिंग 2022 में विषयवार स्थान प्राप्त हुआ।

 

भारत सरकार द्वारा खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हेतु उत्तराखंड राज्य को लगातार दो वर्ष पुरस्कृत किया गया है। यह हमारे किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का परिणाम है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत, अब तक तीन हजार चार सौ सत्तावन करोड़ रुपये की धनराशि किसानों के खातों में हस्तांतरित की गई ह,ै जो उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है। वर्तमान में लगभग सत्ताईस हजार तीन सौ नब्बे मैट्रिक टन मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। मशरूम उत्पादन की दृष्टि से उत्तराखण्ड का देश में पांचवां स्थान है। वर्तमान में शहद उत्पादन लगभग तीन हजार तीन सौ बीस मैट्रिक टन हो गया है तथा उत्तराखण्ड का देश में आठवां स्थान है।

 

औद्यानीकी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। फलों की उत्पादकता एक दशमलव बयासी मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर थी, जो ढाई गुना बढ़कर चार दशमलव बावन मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर प्राप्त कर ली गई है, सेब की अति सघन बागवानी को वृहद स्तर पर बढावा देने हेतु कृषकों को साठ प्रतिशत अनुदान पर आठ वर्षों में पांच हजार हेक्टेयर सेब के अति सघन बागान स्थापना के लिए वर्ष 2023-24 में योजना स्वीकृत कर संचालित की जा रही है। कीवी की बढ़ती मांग एवं जंगली जानवरों से कम नुकसान के दृष्टिगत मा. मुख्यमंत्री जी द्वारा उत्तराखण्ड कीवी पॉलिसी का शुभारम्भ किया गया, जिसके अंतर्गत आठ सौ चौरानवें करोड की लागत से तीन हजार पांच सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल आच्छादित किये जाने का लक्ष्य है।

 

हर्बल और विशेष क्षेत्र की बात करें तो, सगंध पौधा केंद्र द्वारा सगंध फसलों यथा लेमनग्रास, मिन्ट, डेमस्क गुलाब, तेजपात, कैमोमिल की शुरुआत वर्ष 2002 में इस उद्देश्य से की गई, कि उत्तराखण्ड में जंगली जानवरों एवं असिंचित क्षेत्रों हेतु सुरक्षित वैकल्पिक फसलें किसानों को मिल सकें। कैप द्वारा विगत 23 वर्षों में नौ हजार पांच सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में सगंध फसलों का कृषिकरण कराया गया, जिससे अट्ठाईस हजार कृषक, 109 ऐरोमा क्लस्टरों में सगंध फसलों की खेती कर रहे हैं।

 

चाय विकास एवं रेशम विकास में राज्य गठन के समय मात्र 196 हेक्टेयर में कुमाऊं मण्डल विकास निगम द्वारा चाय की खेती की जा रही थी, वर्ष 2004 में उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड के गठन के उपरांत वर्तमान में राज्य में लगभग 1585 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चाय के बागान स्थापित किये गये हैं, जिनमें लगभग छह लाख किलोग्राम हरी पत्तियों का उत्पादन की जा रही है। राज्य स्थापना के समय चार हजार दो सौ रेशम कीटपालकों द्वारा लगभग 90 मीट्रिक टन रेशम कोया उत्पादन किया जा रहा था, जो वर्तमान में लगभग दस हजार पांच सौ कृषकों द्वारा 320 मीट्रिक टन रेशम कोया उत्पादन सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

 

उन्होंने कहा कि उत्पादन के साथ-साथ उत्पाद को बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। राज्य स्थापना उपरांत वर्तमान में राज्य में लगभग 29 कोल्ड चेन इकाइयां, 18 कोल्ड स्टोरेज, 5 सी.ए. स्टोरेज तथा 2 मेगा फूड पार्कों की स्थापना की गयी है। सेब के भण्डारण व सॉर्टिंग ग्रेडिंग हेतु मा. मुख्यमंत्री जी द्वारा एक सौ पैंतालीस करोड की योजना का मई में शुभारम्भ किया गया। कृषकों की सुविधा हेतु वर्ष 2001 से वर्तमान तक तीन सौ पिच्यासी करोड की लागत से 2902 संपर्क मार्ग, निर्मित कराये गये हैं। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय की ‘एक देश एक बाजार‘ की अवधारणा पर उत्तराखण्ड की बीस मंडियों को ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा गया है। बीज प्रमाणीकरण के क्षेत्र में संस्था द्वारा अग्रणी कार्य किया जा रहा है। आज कुल पंजीकृत क्षेत्रफल एक लाख चौदह हजार हेक्टेयर में अड़तालीस लाख सडसठ हजार कुन्तल प्रमाणित बीज उत्पादन किया जा रहा है।

 

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद की है, बल्कि उन्हें आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान की है। किसानों की आय दोगुना करने के उद्देश्य ‘दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना‘ अंतर्गत कृषि कार्यों हेतु एक लाख रुपये तथा कृषियेत्तर कार्यों हेतु तीन लाख रुपये तक एवं स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रुपये तक की धनराशि का ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। फसल बीमा योजना के तहत केन्द्रपोषित पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजनान्तर्गत 13 औद्यानिक फसलों को संसूचित करते हुए अब तक एक हजार एक सौ छियालीस करोड का क्लेम वितरित कर छः लाख पच्चीस हजार से अधिक कृषकों को लाभान्वित किया जा चुका है। वहीं किसान हित में व्यक्तिगत दुर्घटना सहायता योजना के तहत वर्तमान तक चार सौ सोलह कृषक या मजदूर को एक सौ पैंतीस करोड़ दो लाख रुपये दुर्घटना सहायता की धनराशि वितरित की गई है।

 

इसके साथ ही किसानों को नवीनतम प्रौद्योगिकी से जोडने का कार्य किया है। कृषक उत्पादक संगठन या समूहों को 88 कृषि ड्रोन वितरित किए गए। मृदा उर्वरा शक्ति को संरक्षित करने आठ लाख बयासी हजार कृषकों को निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए गए। लघु, सीमान्त एवं महिला कृषकों तथा सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों तक कृषि यंत्रों की पहुंच बढ़ाने हेतु 4643 फार्म मशीनरी बैंक एवं कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किये गये, जिससे पर्वतीय कृषि क्षेत्र में यन्त्रीकरण का उपयोग संभव हो सका है। जैविक कृषि प्रोत्साहन हेतु वर्तमान तक दो लाख तीस हजार हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया जा चुका है। वर्ष 2024-25 के अन्तर्गत परिषद द्वारा लगभग ग्यारह करोड चौवन लाख मूल्य के विभिन्न स्थानीय प्रमाणित जैविक उत्पाद विक्रय कराया गया है। केंद्र सरकार की कृषक उत्पादक संगठन योजना के अंतर्गत प्रदेश में 163 कृषक उत्पादक संगठन गठित किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से कृषि उत्पादन विपणन व्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा रही है।

 

स्टेट मिलेट पॉलिसी के अंतर्गत प्रदेश की मिलेट फसलों के प्रोत्साहन तथा संवर्धन हेतु राज्य सरकार द्वारा 134 करोड़ रुपये की स्टेट मिलेट पॉलिसी का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में न्यूनतम समर्थन मूल्य 4290 प्रति कुन्तल पर 3150 मैट्रिक टन मण्डुवा अन्तःग्रहण किया गया। प्रदेश की स्थानीय फसलों को संरक्षण तथा संवर्धन प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने आठ नवम्बर 2023 को राज्य के पंद्रह उत्पादों को एक साथ भौगोलिक संकेत टैग प्रदान किया है। बागवानी के समग्र विकास हेतु जापान के सहयोग से उत्तराखंड एकीकृत औद्यानिक विकास परियोजना के रूप में उद्यान विभाग के अंतर्गत पांच सौ छब्बीस करोड़ की पहली बाह्य सहायतित परियोजना स्वीकृत करायी गयी, जिसका क्रियान्वयन जनपद टिहरी सहित चार जनपदों में किया जा रहा है।

 

कैबिनेट मंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हमारी सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के लिये सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, राज्य में महिलाओं के लिये सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, राजकीय सेवाओं में खिलाड़ियों के लिये 4 प्रतिशत खेल कोटा, मेगा इण्डस्ट्रियल पॉलिसी 2025 के अन्तर्गत ₹50 करोड़ से अधिक के निवेश पर 20 प्रतिशत कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी, विनिर्माण क्षेत्र में ₹50 करोड़ तक के निवेश पर 40 प्रतिश्त कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी के साथ ही बीते चार सालों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। इसके साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून बनाया गया। समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य बना, राज्य के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज‘ ब्रांड श्री केदारनाथ धाम एवं श्री बद्रीनाथ धाम का सुनियोजित पुनर्विकास, मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत कुमाऊँ के मंदिरों का विकास आदि अनेकों कार्य किये जा रहे हैं।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री जी द्वारा राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती के उपलक्ष में मीडिया प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

 

जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल ने स्वच्छता अभियान को लेकर जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए इको बैग एवं टिहरी चबा संपूर्ण स्वच्छता के बारे में जानकारी दी ।

 

इस मौके पर विधायक टिहरी किशोर उपाध्याय, एसएसपी आयुष अग्रवाल, जिलाध्यक्ष भाजपा उदय सिंह रावत, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चम्बा शोभनी धनोला, सीडीओ वरुणा अग्रवाल सहित मीडिया प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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